अपने पराए हो गए

कुछ ख्वाब हकीकत हो गए,
और कुछ हकीकत ख्वाब हो गए,
जिंदगी ने ली कुछ करवट ऐसी,
कि कुछ पराए अपने हो गए,
और कुछ अपने पराए हो गए।
-सन्नी कुमार

Advertisements

प्यार न करो

प्यार जगा कर कहती हो क्यूं,
कि प्यार न करो,
आँखों को ख्वाब दिखाकर कहती हो क्यूं,
कि ऐतबार न करो,
मेरे दिल में बसती हो तुम,
तुम्हारी हसरतें सजाता हूँ,
तुमको है खबर सबकुछ फिर भी,
कहती हो क्यूं कि प्यार न करो।
-सन्नी कुमार

ख्वाबों को बुनने दो

image

ख्वाबों को बुनने दो,
ख्यालों को पलने दो,
समेट लेंगे ये चादर में आसमां,
जो इनको उड़ने की आजादी दो।

कलियों को खिलने दो,
बचपन को संवरने दो,
बदलेंगे यही संसार को कल में,
जो इनको आज से सपने दो!

बेमतलब न रोको-टोको इनको,
न समझ की सीमाओं में बांधो,
ये स्वछन्द मन कल संवारेंगे दुनिया,
इनको बस सही लगन लगवा दो।

चुनने दो इनको अपने सपने,
जो मर्जी है बनने दो,
ख्याल रखो इनके ख्यालों का,
और सही गलत का भान करा दो।

ख्वाबों को बुनने दो,
ख्यालों को पलने दो,
समेट लेंगे ये चादर में आसमां,
जो इनको उड़ने की आजादी दो।
-सन्नी कुमार

(credit:- Students of G D Goenka Public School, Gaya)

image

आज कल बीमार हूँ

image

अपनी बातों को शब्दों में आज कहना नहीं आ रहा,
अपनों से मिलकर आज नजरें मिलाना नहीं आ रहा,
चुप तो हूँ आज पर आज कोई शांति नहीं है,
आज आंसुओं से गम को धोना भी नहीं आ रहा।

सोचता हूँ छोड़ दू अब लिखना अपनों को,
सोचता हूँ छोड़ दू अब जीना सपनों को,
अब जब फ़र्क़ नहीं परता उनपर मेरे शब्दों का,
सोचता हूँ विराम दूँ अब अपने अल्फ़ाज़ों को।

सुन्न हो रही हथेली को और कितना बोझ दूँ,
जीना छूट गया पीछे, लिखूं अब किस झूठ को,
भाव थे जो सारे आज आंसुओ में बहा दिए,
ख्वाब देखे थे जो कभी, आज है सब जला दिए गए।

न कहने को कुछ नया है,
न अपने अब अपनी सुनाते है,
एक दुरी है दरम्यान,
शिकायत है की मेरी बातें नही ठीक,
न तरीका न इरादा कुछ भी नही ठीक,
मैं भी मानता हूँ की अब कुछ नहीं ठीक,
न हिम्मत है अब और की कर सकूँ सब ठीक,
सो सोचता हूँ कहीं दूर चला जाऊं,
पर खुद से मैं पीछा कहो कैसे छुड़ाऊं?
– सन्नी कुमार
……………………………………………

ख्वाब

IMG_0716ख्वाब,
जिससे मन की खूबसूरती झांकती,
जिसको नहीं जरूरतें बाँधती,
जिसपे किसी का न चलता है जोर,
जो अँधेरी रातों को भी कर दे भोर,
उसी ख्वाब का अब होना है हमको,
उसी ख्वाब को जीना है वर्षों।

ख्वाब,
जिसको शिकायत नहीं लम्हों से,
जिसमें सिफारिश नहीं औरों से,
जो हसरतों के है जहाज सजाता,
जो टूट कर फिर से है जीना सिखाता।
उसी ख्वाब का होना है हमको,
उसी ख्वाब में खोना है हमको।

wordleहाँ वही ख्वाब,
जिसपर न बस मेरा न तुम्हारा,
पर जिसमें हो जग सारा हमारा,
उसी ख्वाब में अब जीते है हम,
और उसी ख्वाब को अब मरते है हम।
हो एक हकीकत और वही ख्वाब हो,
ऐसी ही कोशिश अब हर बार हो।
-सन्नी कुमार

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: