थू है ऐसी राजनीति पे

थू है ऐसी राजनीति पर जहां अपनों को ही छला जाता हो,
नीचता की सारी सीमाएं तोड़, जो जननेता कहलाता हो।

थू है ऐसी राजनीती पे जहां कोई आम होने का स्वांग रचाता हो,
मानवता से गद्दारी कर जो, नए ढर्रे का नेता कहाता हो।

थू है ऐसी राजनीती पे जो झूठी कसमें दिलवाता हो,
अपने बीबीे-बच्चों से ज्यादा जहां , कुर्सी का मोह लुभाता हो|

थू है ऐसी राजनीती पे जो नौटंकी बस सीखलाता हो,
थू है ऐसे राजनेता पर जो, खुजलीवाल कहाता हो।।
-सन्नी कुमार

अगर मेरे शब्द बुरे लगे है किसी आपिये को तो लगे, उनपे आज वाक़ई थूकने का मन कर रहा है, कैसे निर्लज्ज लोग थे वहां, कैसी बेशर्म सोच थी, किस तरह की राजनीती करना चाहते आप इस देश में?? सोचिये, क्या आपको घृणा नहीं होती, वहां मौजूद लोगों को कायर कहूँ, बेशर्म कहूं, हत्यारा कहूँ या कुछ और?? कुछ नहीं कहता बस थूकता हूँ ऐसे घटिया लोगों की राजनीती पर।

निवेदन- अगर आप बुरे समय से गुजर रहे है तो यकीन रखे दिन बदलेगा, आप। थोडा और प्रयास करे, यकीन खुद पर और ईश्वर पर करें औरों से उम्मीद कभी नही, समर्थ बने सक्षम बनें।

ईश्वर गजेन्द्र की आत्मा को शांति दे।

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