सारी-सारी रात जागे

सारी-सारी रात जागे,
तुमसे मुहब्बत की आग जागे,
हूँ मैं दरिया खुद में लेकिन,
तुमसे ही अब प्यास जागे,
सारी-सारी रात जागे…

मुझमें है जो ख़्वाब सारे,
तुमसे ही अब मिलना चाहे,
हूँ मैं खुद में ख़ल्क़त लेकिन,
तुझमें ही अब बसना चाहे,
सारी सारी रात जागे…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

ख़ल्क़त का अर्थ संसार/दुनिया सर है…

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कभी मुग्ध हो मेरी कविता पर..

कभी मुग्ध हो मेरी कविता पर,
तुम अपने कहानी में जो मोड़ बनाओ,
कभी मान मेरी बातों को,
तुम अपने जीवन में जो नए अर्थ सजाओ,
कभी खोकर मेरी आँखों में,
तुम अपने ख़्वाबों में जो मुझे बसाओ,
हो सरस-सुफल मेरा यह जीवन,
तुम अपने में जो मुझे बसाओ..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Hindi Poem on Anniversary

To my beautiful wife on our Anniversary..

आज हमारा इश्क़ थोड़ा
और सयाना हो गया,
दिल ने कभी जो ख्वाब न देखे,

वो सब अब हक़ीक़त हो गया…

हर लत से मुझको तौबा ही था,
पर तुम्हारे साथ का आदत हो गया,
जो कभी जीवन मे उतरेगा नहीं,
वो नशा है मुझको हो गया..

तुमसे मिलके दिल ये मेरा,
है खुदा का जन्नत हो गया,
पलते है मुझमें हर ख़्वाहिशें तुमसे,
कि तू मेरा होना है हो गया..

आज हमारा इश्क थोड़ा
और सयाना हो गया..
©सन्नी कुमार

उनके इकरार की बातें

उनके साथ जो गुज़ारे, उस शाम की बातें,
वो निश्छल-निगोड़ी, इज़हार-ए-इश्क की बातें,
आज मौसम ने फिर बहाई है जो मिलन की बहार,
तो याद आईं हमें, उनके इकरार की बातें।

वो जो साथ थी मेरे, उनके यकीन की बातें,
वो जो उतर गई साँसों में, उस एहसास की बातें,
आज शहर में फिर मन रहा है जो इश्क का त्योहार,
तो याद आई हमें, उनके इकरार की बातें।

थी बहुत खास जो उस हंसी रात की बातें,
जलन चाँद को जिससे उस बेदाग की बातें,
आज फिर इश्क ने जो है दुनिया को संवारा,
तो याद आई हमें, उनकी कही-अनकहीं बातें।

उनके साथ जो गुज़ारे, उस शाम की बातें,
वो निश्छल-निगोड़ी, इज़हार-ए-इश्क की बातें,
आज मौसम ने फिर बहाई है जो मिलन की बहार,
तो याद आईं हमें, उनके इकरार की बातें।
-सन्नी कुमार

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