अंबेडकर जयंति की शुभकामनाएं

बाबा के जन्मदिन पर उनको बधाई, आप जैसा व्यक्तित्व ढूंढना और समझना बहुत मुश्किल है खास कर तब जब भारतीय किताबों में, शहर के चौराहों पर, आपके संविधान और आपके खेले दलित कार्ड में विरोधाभास हो।
I mean एक तरफ जब देश के एक सम्पन्न वकील ने अफ्रीका से क्रांति की शुरुआत की और भारत आकर जिन कपड़ों और नियमों की होली जलाकर खुद आगे नंगे घूम रहे थे, एक ics क्वालीफाईड नेता ब्रिटैन की नौकरी छोड़ आजाद सेना बना रहा था, तो वहीं तब आप एक ऐसे गरीब परिवार से निकले जिसको विदेश मे न सिर्फ पढ़ने का बल्कि देश के लिए संविधान गढ़ने का भी अवसर मिला, और आपने शोषितों के लिए एक शानदार और बराबरी का कानून भी बनाया जो आज फेल साबित हो रहा है/किया जा रहा है, और आज यह निश्चित ही सामाजिक वैमनस्य का कारण बना हुआ है। आपकी आरक्षण को लेकर क्या सोंच थी और इसे किस तरह लागू किया गया है समझना मुश्किल है पर आज यह राजनेताओं के लिए संजीवनी है और पोस्टर बॉय बनाने का यह एक आजमाया आसान तरीका है। खैर आप आज होते तो आप भी क्षुब्ध होते क्योंकि आप बिना किसी आरक्षण के पढ़े थे और उस वक्त विदेश में पढ़े और सबके चहेते रहे जब देश बंगाल-बिहार में लाखों लोग अनाज के दो दानों के लिए तरसते होते थे, पर आज देश आजाद है आपकी बनाई कानून है और लोग अलग अलग जातियों के पोस्टर बैनर लिए भारत को बंद कराना चाहते, इनमे न कोई अधनंगा संत गांधी है, न खून के बदले आजादी सौंपने वाला नेताजी और न आप जैसा ब्लू सूट वाला महान चिंतक…

अम्बेडकर जयंती की शुभकामनाएं सिर्फ उनको जो दल के दलदल से बाहर है, और मौजूदा आरक्षण को लीगल भ्रस्टाचार मानते है।
हे राम!
जय हिंद!
जय भीम!

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गांधी और अम्बेडकर

गांधी और अम्बेडकर दोनों ने वंचितों के लिए आवाज उठायी, गांधी अफ्रीका में कालों के अधिकार के लिए लड़े, समानता मांगी पर अम्बेडकर ने आरक्षण रूपी भीख माँगा.. आज आरक्षण ने इस देश का कबारा कर दिया और अम्बेडकर सिर्फ आरक्षण लाभार्थियों के हीरो बनके रह गए पर गांधी विश्व के हर कोने में सराहे गए।
अम्बेडकर ने शूद्रों को दलित बनाया, चमारों को हीनता से ग्रसित करवाया और BATA को ब्रांड बनने दिया पर गांधी ने शूद्रों को हरिजन बुलाया, सबको सफाई के लिए विशेसकर खुद का मैला खुद साफ़ करने के लिए प्रेरित किया।
हो सकता है कि गांधी और अम्बेडकर दोनों आने वाले वक़्त में ख़ारिज कर दिए जाए और हमे मायावती और रागा किताबों में मिले पर इतना तय है की अम्बेडकर के आरक्षण ने भले कुछ वंचितों का कल्याण किया हो पर इसने देश को बहुत पीछे धकेला और इसके कारण देश आज भी टूटता है।
रोहित बेमुल्ला जैसे दलितों को शिकायत होती है की उनसे भेदभाव होता है पर ऐसे निर्लज्ज भूल जाते है की सवर्णों के साथ भेदभाव करके ही वहां तक पहुंचे है। जो लोव खुद जाति प्रमाण पत्र दे के शिक्षा पाते हो, नौकरी और प्रमोशन पाते हो उनको कोई हक़ नहीं की वो जातीय भेदभाव पे बोले। एक बात और अगर अम्बेडकर के आरक्षण से वाक़ई फायदा हुआ है तो फिर आज आरक्षण की जरूरत खत्म होनी चाहिए थी पर न अब तो जाट, गुज्जर, पटेलों को भी आरक्षण चाहिए, वो क्या है की मुफ़्त की मलाई सब खोजते है।
जय भीम का नारा लगा सकते है पर जय चमार, जय दुसाध कहने में शरमाते है और फिर दोष ब्राह्मणों पे… हीनता का इलाज अम्बेडकर के पास नही बल्कि गांधी के पास ही मिलेगा ये कब समझेंगे हम?

क्या प्रेश्यायें गर्भवती है?

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भारतीय मीडिया खुजलीवाल को नायक के रूप में जाहिलों के बीच स्थापित कर चूका है, राष्ट्रवादियों के राह के इस रोड़े को हम हटाते की मीडिया फिर से गर्भवती हो गयी है, खुजली गैंग प्रसन्न है, मीडिया बधाई गा रही है, नीकु चचा गुजरात मॉडल को फ़ैल बता रहे…कुल मिला के देश को तोड़ने वाले सारे बकलोल-बेशर्म गुजरात की व्यवस्था को बिगाड़ रहे है.. 13 साल से शांत रहा गुजरात अचानक से आरक्षण रूपी भीख के लिए इस कदर रोने लगे, चौंकाने वाला है।
आम्बेडकर के बोये आरक्षण के फसल को काटने के चक्कर में मुफ्तखोर बेशर्म भीड़ एक दूसरे का गला काटने को तैयार हो गयी है, गुजराती भीड़ कम भाड़े के टट्टू ज्यादा क्रियाशील हुए जा रहे….
यह सब प्रधानमन्त्री के UAE के सफल दौरे के बाद और बिहार चुनाव से पहले हो रहा है, एक बार फिर से आंदोलन के जरिये सत्ता की सीढ़ी चढ़ने की तयारी है. खैर, उधर युगपुरुष जी अपने भाई के होने की ख़ुशी में इतने उदार हो गए है की लालू-नीकु से गलबगिया कर रहे है और बिहार मॉडल को दुरुस्त और गुजरात मॉडल को फ़ैल बता रहे है, दिल्ली में wifi, बिजली, पानी मुफ़्त करने, महिलाओं को सुरक्षित करने, हर हाथ रोजगार देने और 500 स्कूल खोल देने के बाद अब वो जल्द ही लालू को ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने की और बिहार को न्यूयॉर्क से बेहतर बनाने की कोशिश में लग गए है… हो सकता है अपने भाई के होने के ख़ुशी में वो सिब्बल, चिदंबरम, कलमाड़ी रजा को भी ईमानदारी का प्रमाण पत्र दे दे।

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