Ideas that can bring change in India

I am having few Ideas that can bring a great change for India, politicians should not object it as it covers every parties dream and that plan is something that a right-wing might take it as a leftist concept and left might find it fascist policy but in fact it’s a panacea that India must take on time or else not only the people but nation and nationalism will die an early death and everyone might have started feeling the hate waves.
Okay, so as I said this plan could change the future of ours and will demolish all the barriers of caste and religion(I am not against anyone but I know that these things must be kept personal).
First Change that I Propose is
1. As In India we are already having Sarv Shiksha Abhiyan Policy, govt has already teachers, many boards, freebies like books and mid-day meals, I would request this to extend this existing policy until a student graduates, and not up to 10th only. In practice, Government must stop all current boards or at least form a new board and it must be directly supervised by Army and The President. That Board must convert all running schools as a boarding school, where these all SC, ST, OBC, General, Hindu, Muslim, Jain and others must be facilitated with the updated syllabus and that must be skill-oriented just after grade 8. Once these students will be learning and living together then, in short, there will be nothing called casteism, and syllabus should be rich enough that would be able to cater enough patriotism and also fulfill national demands.
A question may arise in regard to the availability of funds and infrastructure for everyone and that too for a long period??
Well, Govt can propose to business men to join their hand in PPP mode for providing facilities. Then the students who are getting everything free for 15 years must have to serve the nation back for next 5 years as a retreat. And that again with the same facilities means no salary. Afterall taxpayers never want to pay for irresponsible ones who are free monkeys like some JNUs stupids who chanted against nation and in data, they are the research scholars. Middle finger to them and here now we want to have a policy of give and take. At the age of 26-27 years, these learners would be so tough and talented that they will never ask for reservation but they can even easily create challenges for the top-notch companies and in reality that will be the so-called Azaadi from poverty.

Hope the above-said article was convincing enough to make you understand the remedy of the malfunctioning democracy. This will help us to get rid of the harmful effects of the so-called the largest democracy in the world. We know the strength of democracy lies in the ignorance of its people, So to get rid off all these ill effects the existing infrastructure needs to be modified by providing a square meal throughout the day. JNVs are there but that institute also divides students on the name of caste and religion, so we must have a machine/system/mechanism to wash every Indian brain with the same treatment and make everyone feel special as well as same.

Well, my first priority was education and second is the election where I propose that there must be some eligibility criteria and whoever possess those can be a candidate. Eligibility should demand that a candidate must have social work experience of atleast 5 years, achievements in terms of welfare of others, yes character certificate, formal education and While conducting election, election commission sould be giving equal funds to everyone with least wastage of money and most important there won’t be bullshit option like NOTA but nothing else than President’s rule.

The third change should be that in all government jobs the column questioning the caste and religion should be deleted.
Fourthly, There will be reservations only for differently abled people with low economic status.
Fifthly, If Kashmiri seperators don’t want to be with India give them choice among the Indian Ocean or Arabic Ocean, or better ask them to pack the bag and move to any of the country they want, free tickets may create wonder for them. But yes, no one does dare to pelt stone at the drop of a hat.
Many more proposals are there but let me check first whether I am speaking to the right people or not, are they getting me or not, So I request you all to please share your views also and do you agree with these proposals or should we add something more or these are just a waste. C’mon lest comment and share your views.

Share this post also if you liked it for mass awareness, and let us make it a social campaign of course with an agenda.
Two Indians.

Partha Banerjee
Sunny kumar

(Thank you for reading two indians concept.)


भारत बंद

आज वाला SC/ST द्वारा बन्द था, कल वाला करणी सेना द्वारा, उससे पहले वाला पाटीदार वाला, उससे पहले जाट, उससे पहले गुर्जर, उससे पहले…..
मने इस बन्द की राजनीति से तुमको मिलेगा क्या?? सुप्रीम कोर्ट क्या त्योहारों पे फैसला सुनाती रहेगी, ये राजनीतिक कैंसर से इलाज कैसे सम्भव हो सकेगा इसके लिए हमलोग कब सोचेंगे?
क्यों नहीं सरकार सबको समान शिक्षा-समान अवसर देती है और बदले में लाभान्वितों से कुछ वर्षों का मुफ्त राष्ट्रसेवा का प्रावधान रख देती? क्या टैक्सपेयर को लूट कर नेताजी मौज काटे, वाला रिवाज हमेशा लागू रहेगा??

खैर शहर जहां आज जाम था वहीं मेरे घर में प्लम्बर और पेंटर दोनो भारत को खोले हुए है, और उनको धन्यवाद वरना मेरे शहर में बेचैनी तो है ही गाँव भी बदहाल हो जाता।
खैर भारत के टुकड़े बहुत जल्द हो जाएंगे अगर हम सबने करैक्टर बिल्डिंग पे ध्यान नहीं दिया तो, नफरत को मन से न मिटाया तो, जातीयता नहीं छोड़ा तो, और फिर फायदा किसी दलित का नहीं होगा, किसी करनी सेना या पाटीदार या गुर्जर या किसी का नहीं होगा बल्कि आप पर हमपर हार्दिक, माया, अजीत जैसे लोग थोप दिए जाएंगे.. समझे कुछ?
मै सुप्रीम कोर्ट का समर्थन करता हूँ जो SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच चाहती है, न जाने इसमे औरों को बुरा क्या लगा? बहुत से मित्रों से, जो वाकई में नए भारत को दिशा देने में सक्षम है(पर किसी भी जात, धर्म वाले नेता नहीं है) से व्हाट्सएप्प चैट के आधार पर कह सकता हूँ कि जो लोग आज लाठियां भाज रहे थे उनमें से बहुतेरे को ये भी न पता था कि वो सड़कों पे थे क्यों, और ऐसे लोग का आरक्षण क्या कोई भी भला नहीं कर पायेगा, ये शायद ही कभी मीणा बन पाए।

काश हर प्रदर्शन किसी की जिम्मेवारी होती तो आज मुजफ्फरपुर मे जो छोटी बच्ची का सर फूटा या बदमेड जला या अन्य जगहों पे हिंसाएं हुई है तो उसके लिये लोगों को सजा मिलती या शायद तब इनकी ये हिम्मत न होती।
असहमत है तो अपनी बात रखे।

हो चरित्र निर्माण पर ज़ोर

जब देश में चरित्र निर्माण (Character Building) से ज्यादा महत्वपूर्ण मुखौटा निर्माण (Personality Building) होगा तो देश को खतरा कैंसर से नहीं करप्शन से ही होगा।
आज हर प्रोफेसन बदनाम है, और हम सबमें व्याप्त करप्शन का कीड़ा हावी हुआ है, और कमोबेश आज ईमानदार सिर्फ वही बचे है जिनको बेईमानी का मौका नहीं मिला है। चाहे रोड पे कचरा करना हो या देश का, यह सब हम और आप ही कर रहे और हर दिन अपने को कमजोर कर रहे है, स्थिती वैसी ही है कि कहीं हम ट्रेन से पंखा खोल के ले जाते, तो कहीं सड़कों से ईंट उखाड़ कर तो कहीं बिजली चोरी या तार उड़ाकर। मेरा मतलब हम सब का( सिर्फ नेता कभी नहीं) चारित्रिक पतन हो रहा और अब पर्सनालिटी डेवलोपमेन्ट से ज्यादा वैल्यूज पे बल दिया जाना चाहिए वरना देश के लिए लाखों मुश्किल तैयार है जो इतिहास और भूगोल दोनों बदल देगी।

आप क्या कहते है?

आजाद आप हमेशा याद रहोगे, अमर रहोगे!

गुलाम भारत में जो वीर पैदा हुआ, जिसने देश प्रेम के लिए अंग्रेजों से लोहा लेते हुए खुद को गोली मार दी, उस वीर को सत् सत् नमन। नमन उस सोंच को जिसने खुद को आजाद कहा, नमन उस सोंच को जिसने स्वराज के लिए अपने प्राण त्याग दिए।

अब बात जरा आजाद भारत की जहाँ अफजल, याकूब के निर्लज्ज समर्थन की बात हुयी फिर रोहित वेमुल्ला को शहीद बताया गया.. आजाद भारत में आंदोलनों के नाम पर नौटँकीयां खूब हुयी है और आज लोग खुद को आजाद नहीं कहते आज तो दलित कहाने की होड़ है, फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनते है, हिन्दू क्या भारत के मुसलमान और ईसाईयों में भी जाति व्यवस्था हो आयी बल्कि बढ़ी है… आज स्वराज को नहीं बल्कि आरक्षण के लिए लड़ाई हो रही, क्या जाट, क्या पटेल पूरा देश मुफ़्त की मलाई चाटने को न केवल स्वाभिमान का बल्कि हमारी एकता का भी सौदा कर रहे और ऐसी स्थिति में आजाद को समझना- समझाना मुश्किल हो रहा है!ऐसा क्यों?

निवेदन: शब्दों को महत्व दे

Krishna is everywhere and so in WORDS.. और फिर अक्षर ही ब्रह्म है, अमर है जो हमेशा वायुमण्डल में मौजूद रहेगा, विज्ञान भी यही कहता है ये ध्वनि आपके कानों से दूर जाएगी, खत्म नहीं होगी, सो इस ब्रह्म को सलीक़े से उपयोग में ले इसकी जिम्मेदारी हमारी और आपकी सबकी बराबर है। बाबा कबीर भी यही बोले थे कि “बोली एक अमोल है, जो कोई बोले जानी, हिये तराजू तौली के, तब मुख बाहर आनी। In short we should be selective with our words because it not just imprints in others compiler that further may boost his program execution but if it goes in wrong way then things will give error.. (Hope you get it.)
-आधुनिक विचारों के प्रतिपादक आचार्य श्री श्री १००८ सन्नी कुमार जी महाराज

इस वसंत रूपांतरण के कुछ पुष्प खिलाएँ

Image result for rose plant having full thronesउस पौधे में फूल बमुश्किल चार थे और काँटे हजार, फिर भी उसे गुलाब का पेड़ कहा गया, न कि काँटों का। हो सकता है हम सब में भी हजार बुराई-रूपी काँटे हो पर जरूरत है कि हम उन अच्छाई-रूपी फूलों को संवारे-सहेजे, जिसकी खूबसूरती औरों को आकर्षित करे और जिसकी खुशबू आसपास को सुगंधित करे। आए इस वसंत रूपांतरण के कुछ पुष्प खिलाएँ।

Pic credit: Google Image

Media’s Contribution in development

What is the contribution of Indian Media after independence??
सुबह का अखबार दोपहर में मेज साफ़ करने या शाम को समोसा लपेटने का काम आता है, समाचार चैनलों के पास खबर कम गप्प और विज्ञापन ज्यादा है। निकम्मे इतने है कि हर खबर दिल्ली-एनसीआर में ही बना लेते है, दक्षीण भारत का खबर तो तबतक नहीं दिखाते जबतक बाहुबली १००० करोड़ न कमा ले या खुद थलाइवा राजनीति में कूद न जाए, खैर दक्षीण देर-सवेर दिख भी जाता है पर पूर्वोत्तर राज्य? आधे पत्तरकारों(पत्रकार नहीं) को तो इन राज्यों के नाम भी न पता होंगे बावजूद ये अपनी कलम और आवाज़ को बेच आधी हकीकत दिखाएंगे। आज हर चैनल चंदे से और अखबार विज्ञापनों से भरा है, समाचार तो ये नेताओं का ट्वीट पढकर बना लेते है और जब क्रांति करनी हो तो आपसे आपका जात पूछेंगे। खुद बिके है बावजूद ये किसी को कुछ भी कहने/पूछने को स्वतंत्र है। कोई बताएगा इनका योगदान?? दुनिया की सबसे भ्रष्ट मीडिया कहाँ की है??(अपवाद हर जगह हो सकते है)

दहेज का इतिहास

IMG-20180121-WA0003उत्तर वैदिक काल में विवाह के समय पिता अपनी पुत्री को अपनी इच्छा अनुसार उपहार दिया करते थे जो पहले से निश्चित नहीं हुआ करता था, मध्यकाल में इस उपहार ने अपना स्वरूप बदला और फिर यह स्त्रीधन के रुप में जाने जाना लगा। स्त्रीधन का उद्देश्य कन्या को उसके पारिवारिक जरूरतों समेत ऐसी वस्तुओं को देना था जो उसके बुरे वक्त में काम आए, इसमें धन सम्मिलित था और यह राज परिवारों विशेषकर राजपूतों में प्रचलित था और कन्यापक्ष इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखते थे। मध्यकाल में स्त्रीधन संपन्नो तक सीमित था और पूर्णतः ऐच्छिक था।
आज जिस दहेज की बात करते है उससे ग्रसित थोड़ा-बहुत मै और आप,सब है। आज इच्छा नगण्य और दवाब का दानव इतना बड़ा है कि कन्या के जन्म से ही उसका परिवार शादी की चिंताओ में मरने लगता है। यह दहेज़ रूपी शैतान बेटी का खून कभी उसी के माँ-बाप से(भ्रूण हत्या) तो कभी दहेज़ लोभी पति से करवा देता है।
ऐसे में सरकार ने जो पहल की है वो सराहनीय है, जितने बच्चे व नवयुवक आज इस मानव श्रृंखला में सम्मिलित हुए उनमें सेअगर एक चौथाई भी दहेज़ को खारिज कर दे तो संभवतः आनेवाले दशक में यह शैतान दम तोड़ देगा।
बहरहाल यह शोध का विषय अवश्य है कि दहेज़ शब्द और इसके शैतानी संक्रमण की शुरुआत कब और कहाँ से हुई।
सन्नी कुमार

सपने में लंकेश


C__Data_Users_DefApps_AppData_INTERNETEXPLORER_Temp_Saved Images_images(1)कल रात ख्वाब में एक बूढी महिला आई जो उम्र में मेरे दादी सी थी। अब चूंकि सपने स्पष्ट नहीं होते तो पहले तो गाँव की एक दादी सी लगी पर फिर उनकी अंग्रेजी लूक पे ध्यान गया और मैं समझ गया कि ये गाँव की नहीं बल्कि शहर की कोई ग्रैनी है परन्तु मैं अभी भी उन्हें पहचान नहीं पा रहा था और चूंकि अजनबीयों से कुछ भी पूछना आसान नहीं होता तो मैं उनके कुछ कहने का इंतजार करता रहा और फिर वो बोली “एम लंकेश”, लंकेश सुनते ही ( कन्फ्यूजन वाले लूक में) अपन बोले लंकेश?? पर बाबा आप ग्रैनी लुक में? वो बोली “व्हाट हैपेन? डोंट यू नो मी?
अब तो म अबोध अद्विक की तरह सर हिला के अपनी अज्ञानता बताये.. फिर वो बोली “हे एम गोरी लंकेश, द जर्नलिस्ट हू हैज़ बीन किल्ड आन फीफ्थ सेप्टेम्बर” मेरा तो इतना सुनते ही पसीना छूट गया, सपने में था और वहां भी आँख बन्द और हनुमान चालीसा शुरू हो गया पर तभी वो बोली “अरे वेट, वेट! डोंट रिएक्ट लाइक अ भक्त! हम मने में बोले कि जब भक्त है तो नास्तिक टाइप रिएक्शन कैसे होगा तब तक वो फिर बोलने लगी “आइ वांट यू टू राइट आन सीरियस इसूज़ इन्सटीड दीस पर्सनल अफेयर एंड पोएट्री.. यू नो नेशन इज़ इन रौंग हैंड एंड सी आय हैव बीन किल्ड फाॅर स्पीकींग ट्रूथ..
हम बोले लंकेश जी मुझे आपकी हत्या का दुख है पर आधे सच को मैं अगर झूठ नहीं कह सकता तो आप भी इसे सच नहीं कह सकती। आज जर्नलिस्ट लोग इसी आधे सच से अपनी दुकान चला रहे, क्या आप इससे अछूती थी? आप अगर सच ही बोलती तो प्रहलाद जोशी वाले मानहानि मामले में आप जेल न जाती, बुरा मत मिनिएगा पर आप जिस इंडिया की कल्पना करती है उससे बहुत अलग है मेरा भारत, आप जिस आजादी की बात करती है उसे मेरे गाँव की महिलाएं सनक समझती है…. अब तो वो पूरे गुस्से में थी और बोली मेरा बेटा कन्हैया भी तो उसी गांव से है वो तो मुझसे न केवल सहमत है बल्कि मेरे विचार को आगे युवाओं में लेकर जा रहा, अगर तुम्हारे जैसे युवा उसका साथ दे तो वो गरीबी से, जातियता से फासिवाद से आजादी जरूर दिलवा देगा…अब मेरी हंसी 😁 छूट गई और पूछ लिया कि लंकेश जी क्या आपके समर्थन में कन्हैया और उसके साथी कोई उद्योग लगाएंगे जिससे रोज़गार के अवसर मिलेंगे और गरीबी कम होगी, या आपके समर्थक जातिवाद को खत्म करने के लिए सरकार को जातीय आधार पर लाभ देने से रोकेंगी? अब वो थोड़ी बेचैनी में थी, कहने लगी रोजगार देना, गरीबी रोकना, जातिवाद खत्म करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनके इस बात से हम भी सहमत थे फिर वो बोलने लगी कि संघी ब्राह्मणों ने लोगों का शोषण किया है, ब्राह्मणों ने मंदिरो के चंदा से गरीबों  को दूर रखा है, अघोषित आरक्षण है मंदिरों में क्यों? हम बोले आप चाहती तो अपना मंदिर बना सकती थी यकीन जानिए किसी को आपत्ति न होती बल्कि आपके भी कुछेक अंधभक्त जरूर होते, देश में गुरमित राम रहीम जैसे कि कमी थोड़े न है और वैसे भी पुजारी कौन होगा ये तो मंदिर बनाने वाला ही तय करेगा है कि नहीं? आप भी मंदिर निर्माण कर खुद पुजारी बन सकते है। पर आपको खुद के मन में खुद के लिए स्थापित हीन भावना सताता रहा और आप दोष संघी को देती रही, जिस ब्राह्मणों को आप सब वामपंथी टारगेट करते है क्या देश उसकी वजह से गुलाम रहा? कब किस सदी में देश अपने स्वर्णिम काल में था और क्यों इसपे विचारा कभी आपलोगो ने? क्या विचारती आप आजादी की ऐसी पैरवीकार थी जिनकी दिलचस्पी फ्री सेक्स, किस आफ लव, बीफ, नो ब्रा जैसे मुद्दों में ज्यादा थी। आप ही बताये इन मुद्दों से आप किस गरीब का भला कर रही थी?? अब तो वो गुस्से में मानो नाककटी सूपनखा हो गई और तमतमाती हुई बोली ” don’t act like a Sanghi, try to understand India is a secular country and we all have freedom to express, freedom to eat freedom to convert… हम बिच में ही टोकते हुए बोले कि freedom to hurt, freedom to blame, freedom to nautanki भी मिला था क्या जो हर बार हमारी ही आस्था को चोट पहुंचाती रही? आप गाय खाओ या गू ये आपकी मर्जी पर आप उस निरीह पशु के बहाने हमें चिढाती रही..इतना सुनते ही वह लगभग चिल्लाती हुई बोली I never meant to hurt but in India people should not be divided on the basis of eating habbit…उनकी इस बात से हम सहमत हो गये और भावनात्मक होते हुए एक उम्मीद से बोले कि बस आप एक गाय छोड़ दीजिए बाकि जानवरों से मेरा सरोकार कम ही है…मैं खत्म करता उससे पहले ही वो बोली “नैरो माइंडेड रीलिजीयस फूल यू आर. यू नो इंडिया इज टाप बीफ एक्सपोर्टर… हम बोले कि सब जानते है और आदम की सोंच नहीं समझ पाते कि कैसे कुत्तों को टहलाने वाले एनिमल लवर और गाय को रोटी देने वाले रीलिजीयस फूल हो जाते है….
अब तो वो पूरी नाउम्मीद हो गई और बोली “see you won’t understand, you can’t even see how sanghi Brahmins have made the life of SC/STs a hell. Hinduism is dividing people on caste that is totally insane.
अब उनकी इस आधी हकीकत सो फिर एकबारगी हम सहमत हुए पर जो सच छुपा दिया गया वो पूछ लिया कि क्यों इस जातिय भेद को संविधान खत्म कर देता, जाति तो हिन्दू समाज में कभी था ही नहीं, वर्ण थे वो भी कर्म आधारित मतलब कर्म बदलते ही वर्ण बदल जाता था उदाहरण के लिए बाल्मीकी, ब जैसे कई नाम है। उसके बाद भी अगर वर्ण व्यवस्था पूरी तरह से गलत थी तो याद रखिए उस युग में भारत ज्ञान, कला, विज्ञान में अग्रणी था और हर घर में मैनूफैक्चरींग होती थी, क्या वो स्वरोजगार, वो संपन्नत अब भी है? क्या हम आज भी सबसे बड़ी GDP है क्या देश आज भी सोने की  चीड़िया है? अगर नहीं तो क्यों? क्या इसके लिए ब्राह्मण ही  दोषी है आपके उठाए किन मुद्दों से देश पुनः वह गौरव पा सकेगा?? वो बोली “Sunny, I don’t have much time to discuss all this now. I want you to write a post on my murderer and keep highlighting this so police can take action against those bloody terrorists. This state funeral and gun rounds are not enough.
इतना सुनते ही अहसास हुआ कि देश में दरिंदगी बढ़ गई है, खूनी खेल केरल-कर्नाटक-कश्मीर-बिहार-यूपी-असम-अम्रीतसर हर जगह बढ गया है, पत्रकार भी खूब मरे है पर उनमें से कोई न तो मेरे सपने में आया न उनको तोपों की सलामी नसीब हुई फिर आपकी लेखन, जीवन में क्या खास था??
अब वो एकदम से चिल्लायी You narrow minded bhakt, see what I am doing now… मेरा तो डरके हालत खराब अबकि चालीसा भी भूल गया पर भला हो उस आदमी का जिसने दरवाजा खटखटाते हुए आवाज़ दिया “सन्नी सर, विष्णुपद चलेंगे, पितरीपक्ष में पितरों को याद करने”

(This post is just to share my view on Late Lankesh, may her murders get punished but we are different and having different ideology, I think being a journalist she only shared Hal truths and half cant be full. Share I you agree.)



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