हुनर में खास क्या रखा है

भावनाओं को समझिए तस्वीर में क्या रखा है,
यहां रोज चखते है मूर्ख सफलता का स्वाद लेकर आरक्षण की सीढ़ियां,
फिर हुनर में खास क्या रखा है?

यहां भारत बंद कराने की राजनीति ही होती आई है सालों से,
फिर गरीबी से लड़ाई में क्या रखा है?
सरकारी खर्चे पे रिसर्च करने वाला गरीबी से कुछ यूं लड़ता है,
खुद इंडस्ट्री लगा नहीं सकता शायद तभी पूछता है कि औरों ने कैसे लगा रखा है?

©सन्नी कुमार

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अंबेडकर जयंति की शुभकामनाएं

बाबा के जन्मदिन पर उनको बधाई, आप जैसा व्यक्तित्व ढूंढना और समझना बहुत मुश्किल है खास कर तब जब भारतीय किताबों में, शहर के चौराहों पर, आपके संविधान और आपके खेले दलित कार्ड में विरोधाभास हो।
I mean एक तरफ जब देश के एक सम्पन्न वकील ने अफ्रीका से क्रांति की शुरुआत की और भारत आकर जिन कपड़ों और नियमों की होली जलाकर खुद आगे नंगे घूम रहे थे, एक ics क्वालीफाईड नेता ब्रिटैन की नौकरी छोड़ आजाद सेना बना रहा था, तो वहीं तब आप एक ऐसे गरीब परिवार से निकले जिसको विदेश मे न सिर्फ पढ़ने का बल्कि देश के लिए संविधान गढ़ने का भी अवसर मिला, और आपने शोषितों के लिए एक शानदार और बराबरी का कानून भी बनाया जो आज फेल साबित हो रहा है/किया जा रहा है, और आज यह निश्चित ही सामाजिक वैमनस्य का कारण बना हुआ है। आपकी आरक्षण को लेकर क्या सोंच थी और इसे किस तरह लागू किया गया है समझना मुश्किल है पर आज यह राजनेताओं के लिए संजीवनी है और पोस्टर बॉय बनाने का यह एक आजमाया आसान तरीका है। खैर आप आज होते तो आप भी क्षुब्ध होते क्योंकि आप बिना किसी आरक्षण के पढ़े थे और उस वक्त विदेश में पढ़े और सबके चहेते रहे जब देश बंगाल-बिहार में लाखों लोग अनाज के दो दानों के लिए तरसते होते थे, पर आज देश आजाद है आपकी बनाई कानून है और लोग अलग अलग जातियों के पोस्टर बैनर लिए भारत को बंद कराना चाहते, इनमे न कोई अधनंगा संत गांधी है, न खून के बदले आजादी सौंपने वाला नेताजी और न आप जैसा ब्लू सूट वाला महान चिंतक…

अम्बेडकर जयंती की शुभकामनाएं सिर्फ उनको जो दल के दलदल से बाहर है, और मौजूदा आरक्षण को लीगल भ्रस्टाचार मानते है।
हे राम!
जय हिंद!
जय भीम!

हिरण को मिला न्याय

भारतीय होने के नाते हर निर्णय का सम्मान करता हूँ पर क्या कोर्ट को वाकई हिरण, शेर, बाघ जैसे जंगली जानवर से ही प्यार है, क्या इनको मारना ही, मात्र अपराध है?
गाय जैसे घरेलू जानवर के लिए न PETA बोलेगा न हम और न आप पर क्यों? दो पैर वाले जानवर(इंसानों) में भी जो बाघ (अलगाववादी) है, दहाड़ सकते है संरक्षण उन्हीं को मिलता है, जो हिरण है करोड़ो का कस्तूरी देते है वैसे नीरव को ही भागने दिया जाता है पर बेचारी गाय (गरीब टैक्सपेयर) जिसके बछड़े के हिस्से का दूध(कमाई का हिस्सा) भी तुम पीते हो, उसी को काटने का रिवाज़ क्यों है? क्यों उसके हक़ की बात होती है?
सब ठीक तो है इस दुनिया में जहां हर कोई खुद के सभ्यता और संस्कृति की बात पे मूंछे/दाढ़ी/या कॉलर पे ताव देता है और ईश्वर के नियमों में यकीन रखता है? या हम आज भी पाषाणयुग के खानाबदोश भर ही है और सुधार बस इतना है कि आज हम सब लम्बी लम्बी हांक देते है, और सूट बूट झार लेते है?

क्या कानून गाय (टैक्सपेयर्स) के लिए भी वफादार हो जाये वैसे अच्छे दिन आएगा, या मुझे कल्पनाजीवी(utopian) कहके नकार दोगे तुम?

-श्री श्री (रविशंकर नहीं)

भारत बंद

आज वाला SC/ST द्वारा बन्द था, कल वाला करणी सेना द्वारा, उससे पहले वाला पाटीदार वाला, उससे पहले जाट, उससे पहले गुर्जर, उससे पहले…..
मने इस बन्द की राजनीति से तुमको मिलेगा क्या?? सुप्रीम कोर्ट क्या त्योहारों पे फैसला सुनाती रहेगी, ये राजनीतिक कैंसर से इलाज कैसे सम्भव हो सकेगा इसके लिए हमलोग कब सोचेंगे?
क्यों नहीं सरकार सबको समान शिक्षा-समान अवसर देती है और बदले में लाभान्वितों से कुछ वर्षों का मुफ्त राष्ट्रसेवा का प्रावधान रख देती? क्या टैक्सपेयर को लूट कर नेताजी मौज काटे, वाला रिवाज हमेशा लागू रहेगा??

खैर शहर जहां आज जाम था वहीं मेरे घर में प्लम्बर और पेंटर दोनो भारत को खोले हुए है, और उनको धन्यवाद वरना मेरे शहर में बेचैनी तो है ही गाँव भी बदहाल हो जाता।
खैर भारत के टुकड़े बहुत जल्द हो जाएंगे अगर हम सबने करैक्टर बिल्डिंग पे ध्यान नहीं दिया तो, नफरत को मन से न मिटाया तो, जातीयता नहीं छोड़ा तो, और फिर फायदा किसी दलित का नहीं होगा, किसी करनी सेना या पाटीदार या गुर्जर या किसी का नहीं होगा बल्कि आप पर हमपर हार्दिक, माया, अजीत जैसे लोग थोप दिए जाएंगे.. समझे कुछ?
मै सुप्रीम कोर्ट का समर्थन करता हूँ जो SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच चाहती है, न जाने इसमे औरों को बुरा क्या लगा? बहुत से मित्रों से, जो वाकई में नए भारत को दिशा देने में सक्षम है(पर किसी भी जात, धर्म वाले नेता नहीं है) से व्हाट्सएप्प चैट के आधार पर कह सकता हूँ कि जो लोग आज लाठियां भाज रहे थे उनमें से बहुतेरे को ये भी न पता था कि वो सड़कों पे थे क्यों, और ऐसे लोग का आरक्षण क्या कोई भी भला नहीं कर पायेगा, ये शायद ही कभी मीणा बन पाए।

काश हर प्रदर्शन किसी की जिम्मेवारी होती तो आज मुजफ्फरपुर मे जो छोटी बच्ची का सर फूटा या बदमेड जला या अन्य जगहों पे हिंसाएं हुई है तो उसके लिये लोगों को सजा मिलती या शायद तब इनकी ये हिम्मत न होती।
असहमत है तो अपनी बात रखे।

हो चरित्र निर्माण पर ज़ोर

जब देश में चरित्र निर्माण (Character Building) से ज्यादा महत्वपूर्ण मुखौटा निर्माण (Personality Building) होगा तो देश को खतरा कैंसर से नहीं करप्शन से ही होगा।
आज हर प्रोफेसन बदनाम है, और हम सबमें व्याप्त करप्शन का कीड़ा हावी हुआ है, और कमोबेश आज ईमानदार सिर्फ वही बचे है जिनको बेईमानी का मौका नहीं मिला है। चाहे रोड पे कचरा करना हो या देश का, यह सब हम और आप ही कर रहे और हर दिन अपने को कमजोर कर रहे है, स्थिती वैसी ही है कि कहीं हम ट्रेन से पंखा खोल के ले जाते, तो कहीं सड़कों से ईंट उखाड़ कर तो कहीं बिजली चोरी या तार उड़ाकर। मेरा मतलब हम सब का( सिर्फ नेता कभी नहीं) चारित्रिक पतन हो रहा और अब पर्सनालिटी डेवलोपमेन्ट से ज्यादा वैल्यूज पे बल दिया जाना चाहिए वरना देश के लिए लाखों मुश्किल तैयार है जो इतिहास और भूगोल दोनों बदल देगी।

आप क्या कहते है?

आजाद आप हमेशा याद रहोगे, अमर रहोगे!

गुलाम भारत में जो वीर पैदा हुआ, जिसने देश प्रेम के लिए अंग्रेजों से लोहा लेते हुए खुद को गोली मार दी, उस वीर को सत् सत् नमन। नमन उस सोंच को जिसने खुद को आजाद कहा, नमन उस सोंच को जिसने स्वराज के लिए अपने प्राण त्याग दिए।

अब बात जरा आजाद भारत की जहाँ अफजल, याकूब के निर्लज्ज समर्थन की बात हुयी फिर रोहित वेमुल्ला को शहीद बताया गया.. आजाद भारत में आंदोलनों के नाम पर नौटँकीयां खूब हुयी है और आज लोग खुद को आजाद नहीं कहते आज तो दलित कहाने की होड़ है, फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनते है, हिन्दू क्या भारत के मुसलमान और ईसाईयों में भी जाति व्यवस्था हो आयी बल्कि बढ़ी है… आज स्वराज को नहीं बल्कि आरक्षण के लिए लड़ाई हो रही, क्या जाट, क्या पटेल पूरा देश मुफ़्त की मलाई चाटने को न केवल स्वाभिमान का बल्कि हमारी एकता का भी सौदा कर रहे और ऐसी स्थिति में आजाद को समझना- समझाना मुश्किल हो रहा है!ऐसा क्यों?

निवेदन: शब्दों को महत्व दे

Krishna is everywhere and so in WORDS.. और फिर अक्षर ही ब्रह्म है, अमर है जो हमेशा वायुमण्डल में मौजूद रहेगा, विज्ञान भी यही कहता है ये ध्वनि आपके कानों से दूर जाएगी, खत्म नहीं होगी, सो इस ब्रह्म को सलीक़े से उपयोग में ले इसकी जिम्मेदारी हमारी और आपकी सबकी बराबर है। बाबा कबीर भी यही बोले थे कि “बोली एक अमोल है, जो कोई बोले जानी, हिये तराजू तौली के, तब मुख बाहर आनी। In short we should be selective with our words because it not just imprints in others compiler that further may boost his program execution but if it goes in wrong way then things will give error.. (Hope you get it.)
-आधुनिक विचारों के प्रतिपादक आचार्य श्री श्री १००८ सन्नी कुमार जी महाराज

इस वसंत रूपांतरण के कुछ पुष्प खिलाएँ

Image result for rose plant having full thronesउस पौधे में फूल बमुश्किल चार थे और काँटे हजार, फिर भी उसे गुलाब का पेड़ कहा गया, न कि काँटों का। हो सकता है हम सब में भी हजार बुराई-रूपी काँटे हो पर जरूरत है कि हम उन अच्छाई-रूपी फूलों को संवारे-सहेजे, जिसकी खूबसूरती औरों को आकर्षित करे और जिसकी खुशबू आसपास को सुगंधित करे। आए इस वसंत रूपांतरण के कुछ पुष्प खिलाएँ।

Pic credit: Google Image

Media’s Contribution in development

What is the contribution of Indian Media after independence??
सुबह का अखबार दोपहर में मेज साफ़ करने या शाम को समोसा लपेटने का काम आता है, समाचार चैनलों के पास खबर कम गप्प और विज्ञापन ज्यादा है। निकम्मे इतने है कि हर खबर दिल्ली-एनसीआर में ही बना लेते है, दक्षीण भारत का खबर तो तबतक नहीं दिखाते जबतक बाहुबली १००० करोड़ न कमा ले या खुद थलाइवा राजनीति में कूद न जाए, खैर दक्षीण देर-सवेर दिख भी जाता है पर पूर्वोत्तर राज्य? आधे पत्तरकारों(पत्रकार नहीं) को तो इन राज्यों के नाम भी न पता होंगे बावजूद ये अपनी कलम और आवाज़ को बेच आधी हकीकत दिखाएंगे। आज हर चैनल चंदे से और अखबार विज्ञापनों से भरा है, समाचार तो ये नेताओं का ट्वीट पढकर बना लेते है और जब क्रांति करनी हो तो आपसे आपका जात पूछेंगे। खुद बिके है बावजूद ये किसी को कुछ भी कहने/पूछने को स्वतंत्र है। कोई बताएगा इनका योगदान?? दुनिया की सबसे भ्रष्ट मीडिया कहाँ की है??(अपवाद हर जगह हो सकते है)

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