किसे कहूँ क्या उलझन मन की

किसे कहूँ क्या उलझन मन की,
कौन सुने, समझेगा।
किसे बताऊं पीड़ा दिल की,
कौन फुर्सत में जो समझेगा।
सभी उलझे है अपने सपनों में,
है कौन सुलझा जीवन में।।

चिंताओं का घनघोर धुंध आज,
छाया उम्मीदों के अम्बर में,
जो चाहते है जनहित करना,
समर्थन, संसाधन नहीं, उनके संग में,
कौन साथ देगा उनका जो,
प्रयासरत जग सुंदर करने में।

किसे कहूँ क्या उलझन में,
कौन सुने, समझेगा!

© सन्नी कुमार ‘अद्विक’

बाल दिवस पर कविता

बाल दिवस

तुम ख़ुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आये,
तुम उम्मीदें इस आँगन की,
जिसे बढ़ता देखना सब चाहे।

तुम गीली मिट्टी के वो मानस हो,
जो चाहे खुद में बन जाओ,
हर ज्ञान तुम्हारे अंदर है,
जो मर्ज़ी बाहर ले आओ।

तुम खुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आओ।

हर आशीष तुम्हें, हर साथ तुम्हें,
तुम अपनी जिंदगी जी भर जी जाओ,
पढ़े किताबें दुनिया तुम्हारी,
ऐसी एक सहज कहानी लिख जाओ।

सफ़ल-असफ़ल सब मिथ्या है,
हे अर्जुन! अपना कर्म बस कर जाओ,
है तुमसे यह धन्य धरा,
तुम इसे अपने रंगों से रंग जाओ।

तुम खुशियों के जो बादल हो,
आज बरसो सावन ले आओ।

आपका
सन्नी कुमार अद्विक

Wish you all a happy children day आप सब में जो बचपन समाया है उसे जश्न के हजारों अवसर मिले यही कामना।

NCR में बढ़ते प्रदूषण से

NCR में बढ़ते प्रदूषण को वजह जो भी किसानों को मानते है उनकी योग्यता को श्री श्री(रविशंकर नहीं) खारिज करते है। किसानों के पास पुआल जलाने के अलावा कोई उपाय नहीं है, इसे खाने वाले देशी गाय को तो मनुष्यों की भूख चर गई। आज AC का आम होना, अकेले कारों में घूमना, और पटाखे को भी आप सबसे बड़ी समस्या नहीं कह सकते, समस्या कुछ और है

समस्या है NCR का ओवरलोड होना, आस पास के राज्यों का फेल होना, सरकार को अगर राजधानी से प्यार है तो यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में यहाँ की कम्पनियों को शिफ्ट कराये, और इसका टेस्टिंग सरकारी विभागों, सरकारी कर्मचारियों और मीडिया हाउस से करे। सही लगे तो शेयर करे।

मैं दिल्ली लौट आया हूँ

कविताएं लिखता था जिस पते से,
वहीं फिर लौट आया हूँ,
है आती मुहब्बत की खुशबू जिस बाग में,
वहीं आज फिर से आया हूँ,
शाम ढलते ही फूलों से,
जहाँ अलग आती है ‘खुशबू’ रोज,
उसे अपने हर ‘आज’ में भरने,
मैं दिल्ली लौट आया हूँ..

भले क़िस्सों को जीना, ख़्वाबों में होना,
हर पल में मुस्कुराना, मैं भूल आया हूँ।
पर गर पढोगे कभी, फ़ुर्सत में मुझे,
कुछ पन्ने पीछे ही सही, मैं सब छोड़ आया हूँ।
ये क़िस्मत है मेरी, या साज़िश तुम्हारी,
जो नए हुनर की तलाश में तुम तक,
मैं दिल्ली लौट आया हूँ..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

मैथ बाज़ार

चलो आज हिसाब करते है,
खेल खेल में आज व्यापार करते है,
सन्नी सर कहते है कि आइडिया बड़ा और शुरुआत छोटा होना चाहिए,
सो आज हम भी एक कोशिश कामयाब करते है,
चलो आज मैथ बाज़ार में व्यापार करते है।

हो सबको आज ख़बर की यहाँ,
अब और गणित मुझे नहीं सताता है,
किताबों से निकल कर बाहर,
अब खेल के मैदान में भी संग वह आता है,
एवरेज, रनरेट और इकॉनमी यह गणित मुझे सिखाता है।

नहीं हूँ आज इस बाजार अकेला,
हर ओर यहाँ है जो गणित है छाया,
क्रय-विक्रय-फन-फैक्ट्स के बूथ,
हर ओर बस गणित है छाया,
जो जटिल अबूझ पहेली था अबतक,
उसको हमारे गुरुओं ने है सरल बनाया।

आओ सब मिल आज हिसाब करते है,
जीत हार, लाभ हानि को जान,
आज गणित के व्यवहारिक गुर सीखते है,
कितना सुंदर हुआ है माहौल,
चलो आज गणित संग मस्ती करते है।😜

©सन्नी कुमार अद्विक

कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल

कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल क़िस्सों में बदल जाएंगे,
बदलाव की आंधी से डर मांझी जब कहीं और वो लंगर डालेंगे,
यह मोड़ जो मंजिल सी प्यारी हो गई थी,
कल नये शग़ल, नई कोशिशों में पीछे छूट जाएंगे..
एक अज़नबी शहर के, कई दिलों में घर बन रहा था मेरा,
कल दूरियों की बर्फ़ में शायद हम बाहर कर दिए जाएंगे,
हसरत अब भी है कि सबकी मुस्कुराहटों में बना रहा हूँ, पर अफसोस कल आंसुओ की बारिश में अपनों से दूर हो जाएंगे..
कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल,
क़िस्सों में बदल जाएंगे।

आसान नहीं था मेरा गोएनकन हो जाना,
ज्ञान की धरा पर यूं गुरु शिक्षा सम्मान पा जाना,
पर यह परिवार, यह सम्मान देने वाला शहर, कल में याद बनकर रहकर जाएंगे,
सीखता-सीखाता जिस आँगन को अपना माना था,
कल वहाँ के खिलते ख़्वाबों से हम महरूम हो जाएंगे,
स्वागत हुआ था नवम्बर 15 को एक बड़े मंच पे जगह देकर,
अक्टूबर 19 में वहीं से एक पल में विदा हो जाएंगे..
कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल, क़िस्सों में बदल जाएंगे।

आसान नहीं होता कहीं इतना, स्टाफ़ रूम में मित्रों का मिल जाना,
बिना हिचक के काम बांट यूं मिनटों में निपटा लेना,
कल यही साथ यही विश्वास हमसे रूठ जब जाएंगे,
नए ठौर की तन्हाइयों में फिर इन भावों की गर्माहट से अलाव जलाएंगे,
धन्य है यह गोयनका हमारा, सारे जहां को हम बताएंगे।

आसान नहीं होता कहीं इतना, स्टाफ़ रूम में मित्रों का मिल जाना,
बिना हिचक के काम बांट यूं मिनटों में निपटा लेना,
कल यही साथ यही विश्वास हमसे रूठ जब जाएंगे,
नए ठौर की तन्हाइयों में फिर इन भावों की गर्माहट से अलाव जलाएंगे,
धन्य है यह गोयनका हमारा, सारे जहां को हम बताएंगे।

आसान नहीं होता हंसों में मुझ बगुले का यूं मिल जाना
रोज बदलते चेहरों में कुछ देर अपने मूल्यों पे टिक जाना,
बकैतों की भीड़ में कम शब्दों में सब कह जाना, रैंचो बन प्रधान के मन को भा जाना,
हर्षित करता है बड़े साहब का मुझमे जोश बढ़ा देना,
कभी ज्वालामुखी कभी डायनामाइट, कभी मुझ अनुज को गले लगा लेना,
आसान नहीं होगा आपके सपनों से यूं कट जाना,
लीजेंड सर की प्लानिंग और execution का हिस्सा न हो पाना,
सैनिक शिक्षक किसान को लेकर आपके विचारों को न सुन पाना,
पर मेरे नाट्य आपकी बातें, अभिषेक जुविरिया की कोशिश कल में भी सराहे जाएंगे,
जब भी होगा पन्द्रह अगस्त वह मंचन, वह बातें मुझे रुलायेंगे,
एक टीस रहेगी क्यों उस दिन विशेष अंग्रेजी थीम था थोपा,
पर सीखने में सब जायज सो गलती मान खुद की हम कर लेंगे,
जिनको भी करना हो गुस्सा करे, हम सही कर जाएंगे,
आप से हो या बच्चों से सही वक्त सराहे जाएंगे,
कल जो होंगे दूर हम आप हमें हम आपको याद आएंगे,
कल जिंदगी के कुछ अनमोल पन्ने,
क़िस्सों में बदल जाएंगे।

कल यह साफ नियत की कड़वी बोली,
इन चहारदीवारीयों में फिर गूजेंगे,
टेबल नम्बर वन के बन्दे कब सही सराहे जाएंगे,
हाँ जी हां जी के शोर में अभी और कितने प्रीटेंडर आएंगे,
कहने को बहुतों शब्द है पर क्यों कहे जब जाया कर दिए जाएंगे,
आखिरी प्रेम मेरा आप सबको,
जाते-जाते एक लिटमस देकर जाएंगे,
जो सीखा आप सब से उसका आभार जता हम जाएंगे,
है मेरा भी चाह यही हो नम्बर 1 कैम्प्स हमारा,
सन्दर्भ उसी में एक कोशिश करके जाएंगे,
नबेन्दू-नीला-श्रुति-इमरान-जीशान संग,
फर्स्ट बैच अब चित्रों तक रह जाएंगे,
जय हो इस प्रांगण का सदा, जो है उनको शुभकामनाएं दिए हम जाएंगे,
जिंदगी के कुछ अनमोल पल, क़िस्सों में बदल जाएंगे।
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Thank You Everyone! Love

SkillUp Bootcamp | IT Workshop for Educators

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Learning something new takes time. Sure, you could sit at the computer and helplessly click around to teach yourself the software. But as it is never guided so it is not going to be easy and so I’m here to train you the better and simpler way to do things. SkillUp Bootcamp workshops not just upgrade your skills but it also provides you with the opportunity to collaborate with other like-minded students/professionals.
This workshop is for you If you don’t have the time to teach yourself or to enrol for any full time/part-time course; here with me, you can learn these must-know skills in a session or two. To be very honest I am a newbie as an Independent trainer but I have trained 1000+ students of different age group on various topics such as Audio-Video Editing, Blogging, Programming, SEO, Web Development and now I am looking forward to giving my services to individuals who are having a high interest in learning these events.
If you are also the one who is interested and thinks I may be helpful to you please share the asked details. I would love to train you. (Note: I do take classes only on Sunday and Currently I am available only for Gaya, Patna, Begusarai and Muzaffarpur)
Thank You
Sunny Kumar

इश्क जरूरी, बातें जरूरी..

इश्क जरूरी, बातें जरूरी,
रिश्तों में एहसास जरूरी,
ख़्वाब जरूरी, किस्से जरूरी,
कागज़ पे है स्याह ज़रूरी,
लिखना जरूरी, पढ़ना जरूरी,
जीवन में है बढ़ना जरूरी,
हम भी जरूरी, तुम भी जरूरी,
अपनों सा से मिलना जरूरी….

कोशिशें जरूरी, क़ामयाबी जरूरी,
कहने को कुछ क़िस्से जरूरी,
शामें जरूरी, रातें जरूरी,
आशाओं के भोर जरूरी,
कृष्ण जरूरी, राधा जरूरी,
प्रेम दीवानी मीरा जरूरी,
इश्क़ जरूरी, बातें जरूरी,
रिश्तों में एहसास जरूरी।
© सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Ishq jaruri, baatein jaruri,
Rishton me ehsaas jaruri,
Khwab jaruri, kisse jaruri,
Kaagaj pe hai syah jaruri,
Likhna jaruri, padhna jaruri,
Jeevan me hai badhna jaruri,
Hum bhi jaruri, tum bhi jaruri,
Apno sa se milna jaruri….

Koshishe Jaruri, Kamyaabi Jaruri,
Kahne ko kuchh kisse jaruri,
Shaamein jaruri, raate jaruri,
Aashaon ke bhor jaruri,
Radha jaruri, Krishna jaruri,
Prem ki maari meera jaruri,
Ishq jaruri, baatein jaruri,
Rishton me ehsaas jaruri..

© Sunny Kumar Advik

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