Open Letter to School Managements

Dear School Managements/Decision Makers,
You are very much aware of the current situation and I am thankful that your school has not halted the process of knowledge sharing and teachers are doing better to keep students engaged through online classes. Thank you for giving them the authority to do so. I am writing this letter to share my three concerns and would be happy if you already applied these, If not please do so and thank you for the same in advance. Below are my requests/concerns.
1. You know Online classes require more preparedness from a teacher, it requires added skillsets and it is not an easy job but they are doing it. Almost every private teachers are taking classes during this locked-down which should be appreciated with timely salary. (Still, there are many schools which haven’t paid for March.)
 
2. Another fact is online classes need least infra expenses and almost every school is using free tools to cater to education and hence they must give a fair relaxation to the parents or a kind of #Giveup campaign can be run for efficient parents and aids can be provided to comparatively EWS, this is what a wonderful family can do to fight it together.
 
3. Need not to forget that the marginalised ones are the support staffs, be it transport staffs, cleaning staffs or others they should be given salary on priority, as they hardly have a saving, reason managements better understand and this can easily be managed by the development fees so far schools have taken.
 
On a lighter note public gathering is not allowed so all your unnecessary expenses are managed, use those funds for your extended family members i.e. your staffs.
 
Written because I had an input that some of you read me and expects that It goes to yous in the right frequency.
Best Wishes.
#ShowSomeValue #FightItTogether

मेरे ‘कुछ’ लोग,

मेरे ‘कुछ’ लोग,
तुम्हारे ‘बहुत’ सारे
बर्बाद करेंगे हमें,
जो मूक रहे प्यारे।

झूठ की राजनीति,
थूक की पन्थनीति,
नापाक करेंगे हमें,
साजिशों की मौननीति!

पत्थरों का फेंकना,
बहादुरों को घेरना,
शर्मिंदा करेंगे हमें,
सच से मुँह फेरना!

मेरे ‘कुछ’ लोग,
तुम्हारे ‘बहुत’ सारे,
बर्बाद करेंगे हमें,
जो मूक रहे प्यारे।

मीठा मीठा चुनना,
मीठा ही बनना,
बर्बाद करेंगे हमें,
कड़वा सच न कहना!

साथ साथ रहना,
विश्वास कम करना,
चिढायेंगे अब हमें,
आपदा में भी लड़ना!

मेरे ‘कुछ’ लोग,
तुम्हारे बहुत सारे,
बर्बाद करेंगे हमें,
जो मूक रहे प्यारे!
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

यह मेरे उन मानवतावादी मित्रों के लिए समर्पित जिन्हें देश मे बढ़ते सम्प्रदायवाद की चिंता है, जो बंगलादेशी घुसपैठियों के लिए तो खूब चींखते है पर इसी देश के डॉक्टर के लिए कोई चिंता नहीं, पत्थर बरसाने वाली भीड़ पर चुप है, जो अनुराग को शेयर करते है और सलमान होते ही पोस्ट हटाते है, उन महान लोगों को यह समर्पित कुछ शब्द है, समझ आये तो समझे…बाक़ी अपन भी समझने में लगे है।
स्टे होम, स्टे ब्लेस्ड!!

एडवेंचर टू चेंज । परहित में आनन्द

आज इस दशक के पहले दिन काफ़ी सकारात्मक महसूस कर रहा हूँ, यह दशक भारत और भारतीयों का होने वाला है ऐसा पूर्ण विश्वास है और इसके लिए एड़ी-चोटी का प्रयास भी रहेगा।।

दोस्तों बचपन में एक कहानी पढ़ी थी जिसमें एक लेखक हर सुबह समुद्र किनारे एकांत में खुद से बाते करने जाता था, एक रोज जब वह समुद्रतट पर टहल रहा होता है तो उसे दूर एक व्यक्ति पर नजर पड़ती है जो ऐसा लगता है मानो कोई नृत्य कर रहा हो, जिज्ञासा वश उसकी हरक़त को नजदीक से देखने पहुंचता है तो पाता है कि वह व्यक्ति स्टारफिश को पानी में उठा उठाकर फेंक रहा है, इस पर उस लेखक ने उस व्यक्ति से पूछा कि भाई आप ऐसा क्यों कर रहे है तब उस व्यक्ति ने कहा कि जल्दी ही धूप तेज होगी और फिर ये स्टारफिश यहीं बालू पर गर्म होकर मर जायेंगे इसलिए इन्हें वापिस पानी में भेजकर इनकी जान बचा रहा हूँ। लेखक ने फिर उससे पूछा कि समुद्र मिलों-मिल तक फैला है, तुम इतने मछलियों को कैसे बचाओगे, क्या डिफरेंस ला पाओगे? तभी उस नौजवान ने एक स्टारफिश लेकर पानी में उछाल दिया और कहा कि मैंने उसके जीवन में डिफरेंस ला दिया है..यह सुनते ही उस व्यक्ति ने एक रोमांच का अनुभव किया और दोनों कुछ देर तक स्टारफिश को पानी मे फेंकते रहे…..

दोस्तों यब कहानी सिर्फ पढ़ने में आनन्द नहीं आएगा बल्कि इससे प्रेरणा लेने में, इसको जीने में आनन्द आएगा और यही आनन्द कल हमारी Creacting India की टीम को मिला और यह सम्भव हो पाया उन सभी स्नेही-भावुक परहित का ध्यान रखने वाले मित्रों के कारण जिनकी मदद से कल जब दुनिया एक नए दशक के स्वागत में झूम रही थी तब हमारी टीम आपकी मदद से जो भी सम्भव हो पाया उस प्रेम को लेकर, हमने एक नेक कोशिश बोधगया के उन असहाय लोगों के बीच में की जो इस सर्द में भी फुटपाथ पर जीने को विवश है। दोस्तों कल फिर हमारा जीवन धन्य हुआ जो हम कुछ चेहरों पर कुछ पलों का ही सही, मुस्कान लेकर आ पाए।
दोस्तों, कल का अनुभव वास्तव में बहुत भाड़ी रहा, सड़कों पर जीने को मजबूर लोगों में कुछ समय के सताए है, तो कुछ कुसंस्कारों के कारण भी अभागे हुए है, कुछ ऐसे भी लोग है जिनके बच्चे सबल-सफल-चपल है और इनको छोड़ चुके हज ऐसे लोगों का दर्द मानवता पर प्रश्न उठाता है, कुछ लोग परिवार के लिए भी फुटपाथ पर, रिक्शा पर ही सो जाते है, ऐसे मेहनतकश लोगों को हमारा सलाम है। कल इन लोगों के बीच केक काटना, नए वस्त्र, कम्बल और कुकीज़ का वितरण सब आपलोगों के कारण सम्भव हो गया, थैंक्यू, थैंक्यू सो मच!

हम आप लोगों से आग्रह करेंगे कि बेशक आप सबकी मदद न करे, पर अगर आप एक स्टारफिश को भी उसके जीवन को पुनः जीने का अवसर दे देते है, उसे रेत से उठाकर फिर से पानी में फेंक देते है तो निश्चय ही आपका जीवन, यह पोस्ट और creacting india का सपना पूरा हो जाएगा।
इस मुहिम में हमारा सहयोग देने के लिए हमारे टीम मेम्बर्स श्री विनोद कुमार, श्री अभिषेक कुमार, निशा कुमारी, श्री राजू ठाकुर, शिवम कुमार, सीमा कुमारी, राहुल कुमार, माजिद आलम और आँचल सिंहा का धन्यवाद करता हूँ जी इस ठंड में रात के तीन बजे तक इस एडवेंचर को फील करने के लिए सड़कों पे थे, ईश्वर आप सबको सफल बनायें यही आशा।
यह मुहिम अकेले Creacting India के लिए आसान नहीं होता अगर आप लोग साथ न देते, हम सभी आभारी है प्रियंका मैडम(प्रिंसिपल JKY स्कूल) जनार्धन प्रसाद सर, राबिया ख़ानम मैडम, अजय गुप्ता सर, सुमन सागर सर, गजाला मैम, छवि मैम, अर्पणा मैम, प्रशांत सर, प्रवीण सर, ज्योति मैम, निधि मैम, ममता मैम, छोटू सर, संजीव जी, अक्षय कुमार जी, स्नेहा सिन्हा मैम, प्रमोद लाल सर,रश्मि मैम(प्रिंसिपल अध्ययन किड्स) शांतनु सर, सत्यजीत राय सर, रवि कृष्णा सिंह जी, अमित कुमार(डायरेक्टर अध्ययन किड्स), महेश सर (CEO Linguatech), प्रमोद कुमार सिंह-सुनीता सिंह जी, अभिजीत भट्टाचार्य, रीना राय जी, प्रमोद सर और उनका परिवार, मोनी विश्वकर्मा, आकाश सिन्हा जी, अंजन कुमार शरण (MBGB),रोहन गौरव, प्रदीप शर्मा, शगुफ्ता मैडम, अर्चना मैडम, खुशबू मैडम, मिलकिस मैडम, दिवाकर सर, दिव्या मैडम, शालिनी सिंह मैम, गणेश कुमार सर, निकेश सर(डायरेक्टर अजोरा स्कूल) तथा उन सभी मित्रों का जिन्होंने हमारे पोस्ट को पढा और हमें हतोत्साहित नहीं किया, आप सब को कोटि कोटि धन्यवाद और यही प्रार्थना की आने वाला हर दिन आपके जीवन में सकारात्मकता का संचार करे और आप सब यूंही अपना और औरों के ख्याल रखते रहे।
धन्यवाद

Creacting Indiaके इस पहल को यहाँ पढ़े और उनको प्रोत्साहित करें।

https://creactingindia.wordpress.com/category/charity-work/

https://creactingindia.wordpress.com/2019/12/26

#AdventureToChange

#CreactingIndia

किसे कहूँ क्या उलझन मन की

किसे कहूँ क्या उलझन मन की,
कौन सुने, समझेगा।
किसे बताऊं पीड़ा दिल की,
कौन फुर्सत में जो समझेगा।
सभी उलझे है अपने सपनों में,
है कौन सुलझा जीवन में।।

चिंताओं का घनघोर धुंध आज,
छाया उम्मीदों के अम्बर में,
जो चाहते है जनहित करना,
समर्थन, संसाधन नहीं, उनके संग में,
कौन साथ देगा उनका जो,
प्रयासरत जग सुंदर करने में।

किसे कहूँ क्या उलझन में,
कौन सुने, समझेगा!

© सन्नी कुमार ‘अद्विक’

बाल दिवस पर कविता

बाल दिवस

तुम ख़ुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आये,
तुम उम्मीदें इस आँगन की,
जिसे बढ़ता देखना सब चाहे।

तुम गीली मिट्टी के वो मानस हो,
जो चाहे खुद में बन जाओ,
हर ज्ञान तुम्हारे अंदर है,
जो मर्ज़ी बाहर ले आओ।

तुम खुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आओ।

हर आशीष तुम्हें, हर साथ तुम्हें,
तुम अपनी जिंदगी जी भर जी जाओ,
पढ़े किताबें दुनिया तुम्हारी,
ऐसी एक सहज कहानी लिख जाओ।

सफ़ल-असफ़ल सब मिथ्या है,
हे अर्जुन! अपना कर्म बस कर जाओ,
है तुमसे यह धन्य धरा,
तुम इसे अपने रंगों से रंग जाओ।

तुम खुशियों के जो बादल हो,
आज बरसो सावन ले आओ।

आपका
सन्नी कुमार अद्विक

Wish you all a happy children day आप सब में जो बचपन समाया है उसे जश्न के हजारों अवसर मिले यही कामना।

NCR में बढ़ते प्रदूषण से

NCR में बढ़ते प्रदूषण को वजह जो भी किसानों को मानते है उनकी योग्यता को श्री श्री(रविशंकर नहीं) खारिज करते है। किसानों के पास पुआल जलाने के अलावा कोई उपाय नहीं है, इसे खाने वाले देशी गाय को तो मनुष्यों की भूख चर गई। आज AC का आम होना, अकेले कारों में घूमना, और पटाखे को भी आप सबसे बड़ी समस्या नहीं कह सकते, समस्या कुछ और है

समस्या है NCR का ओवरलोड होना, आस पास के राज्यों का फेल होना, सरकार को अगर राजधानी से प्यार है तो यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में यहाँ की कम्पनियों को शिफ्ट कराये, और इसका टेस्टिंग सरकारी विभागों, सरकारी कर्मचारियों और मीडिया हाउस से करे। सही लगे तो शेयर करे।

मैं दिल्ली लौट आया हूँ

कविताएं लिखता था जिस पते से,
वहीं फिर लौट आया हूँ,
है आती मुहब्बत की खुशबू जिस बाग में,
वहीं आज फिर से आया हूँ,
शाम ढलते ही फूलों से,
जहाँ अलग आती है ‘खुशबू’ रोज,
उसे अपने हर ‘आज’ में भरने,
मैं दिल्ली लौट आया हूँ..

भले क़िस्सों को जीना, ख़्वाबों में होना,
हर पल में मुस्कुराना, मैं भूल आया हूँ।
पर गर पढोगे कभी, फ़ुर्सत में मुझे,
कुछ पन्ने पीछे ही सही, मैं सब छोड़ आया हूँ।
ये क़िस्मत है मेरी, या साज़िश तुम्हारी,
जो नए हुनर की तलाश में तुम तक,
मैं दिल्ली लौट आया हूँ..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

मैथ बाज़ार

चलो आज हिसाब करते है,
खेल खेल में आज व्यापार करते है,
सन्नी सर कहते है कि आइडिया बड़ा और शुरुआत छोटा होना चाहिए,
सो आज हम भी एक कोशिश कामयाब करते है,
चलो आज मैथ बाज़ार में व्यापार करते है।

हो सबको आज ख़बर की यहाँ,
अब और गणित मुझे नहीं सताता है,
किताबों से निकल कर बाहर,
अब खेल के मैदान में भी संग वह आता है,
एवरेज, रनरेट और इकॉनमी यह गणित मुझे सिखाता है।

नहीं हूँ आज इस बाजार अकेला,
हर ओर यहाँ है जो गणित है छाया,
क्रय-विक्रय-फन-फैक्ट्स के बूथ,
हर ओर बस गणित है छाया,
जो जटिल अबूझ पहेली था अबतक,
उसको हमारे गुरुओं ने है सरल बनाया।

आओ सब मिल आज हिसाब करते है,
जीत हार, लाभ हानि को जान,
आज गणित के व्यवहारिक गुर सीखते है,
कितना सुंदर हुआ है माहौल,
चलो आज गणित संग मस्ती करते है।😜

©सन्नी कुमार अद्विक

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