Holi Special

होली में बौराय के,
हम खूब करब ठिठोली,
जे-जे लगिहे भाभी हमर,
सबके रंगब घघरा-चोली।
जोगीजी सारारारा

भइया के पैर छुअब,
बउआ के नेह के चन्दन,
रंग से शराबोर करके,
हम करब सबनी के वंदन..
जोगीजी सारारारा

भरब एमरी न बाल्टी में पानी,
न पिचकारी ले के दौरब,
जे-जे कहिहै पानी बचाव,
सबके नाली में रखब..
जोगी जी सारारारा 😜

होए जे भी मन में मैल,
उ ये होली हम धोएब,
मिलब बिछुड़ल से और बड़कन से,
सबके आशीष हम लेहब…
जोगीजी सारारा
©सन्नी कुमार ‘हुड़दंगी’
Sunnymca.wordpress.com

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सारी-सारी रात जागे

सारी-सारी रात जागे,
तुमसे मुहब्बत की आग जागे,
हूँ मैं दरिया खुद में लेकिन,
तुमसे ही अब प्यास जागे,
सारी-सारी रात जागे…

मुझमें है जो ख़्वाब सारे,
तुमसे ही अब मिलना चाहे,
हूँ मैं खुद में ख़ल्क़त लेकिन,
तुझमें ही अब बसना चाहे,
सारी सारी रात जागे…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

ख़ल्क़त का अर्थ संसार/दुनिया सर है…

मुझे क्यों तुमसे प्यार है

तुम पूछती हो न कि मुझे तुमसे क्यों प्यार है,
होठों पे क्यों तुम्हारा ही नाम है,
तो सुनो एक सच तुमको आज दिल से मैं बताता हूँ,
चाहा है जबसे तुमको हुआ तबसे मुझे खुद से ही प्यार है..

तुम्हारे होंठों पर जब भी सजता हूँ मैं,
सच है सुकून में तब होता हूँ मैं,
तुम्हारी आँखे मुझे ख्वाब दिखाती है,
मेरा होना इनमें मुझे खुद से ही मिलवाती है,
सच है कि मुझे इश्क़ है तुमसे बेपनाह,
क्योंकि यह मुझमें इंसान बसाती है…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

महिला दिवस को समर्पित कविता

Happy International Woman’s Day to everyone. Not just today but every day is urs. Enjoy

Life iz Amazing

दुनिया की ख़ास ख़बर नहीं,
मैं आज अपनी बात ही करता हूँ,
नारी का क्या मोल मेरे जीवन में,
मैं उसी पर आज कुछ कहता हूँ।

जब जीवन यह गर्भ में था,
एक नारी ने ही पाला था,
भूल के खुद के कष्टों को जिसने,
मुझे नौ महीने तक संभाला था।

जब जन्म हुआ थी वो सबसे हर्षित,
उसने ही परिचय दुनिया से करवाया था,

नजर लगे न धूप लगे,
सो ममता के आंचल में छिपाया था।
छलके होंगे उसके खुशी के आंसू,
जब मां कहकर उसे पुकारा था,
थी मेरा सर्वस्व वह नारी,
जिसने इस जन्नत में मुझे उतारा था।

बांटती है जो बचपन के किस्से,
मुझे आज भी नादान बूझती है,
बड़ी भोली है माँ मेरी,
वो आज भी ” खाना खाया” पूछती है।

शैशव में मुझे माँ ने संभाला,
बचपन की सखा बहनें भी थी,
खूब लड़े जिन रिश्तों से हम,
वो डोर बड़ी ही पक्की थी।

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उसने कहा था कि क्या खूब लिखते है आप

उसने कहा मुझसे की क्या खूब लिखते है आप,
मैं सच्चा था कह दिया क्या ख़ाक लिखता हूँ मैं,
वो मासूम है न समझी, तो बतलाना पड़ा,
की हजारों भावों का होना है तुम्हारे साथ,
उनमें से मुश्किल-ए-दो-चार लिखता हूँ,
यूँ तो समंदर भर है तुमसे हसरतें,
पर आदमी बौना हूँ एक-आध लिखता हूँ,
कभी तो मन होता है कि तुम्हें एक कामयाब क़िताब बना सजा लूं,
पर डर है कि जो तुम किताब हो गई तो कहीं खो न दूँ तुम्हें,
सो तुम्हें ही तुम्हारी कविताएं लिखता हूँ,
तुम ही कहो क्या मैं मस्त लिखता हूँ,
तुम हो एक खूबसूरत ख़याल मैं बस शब्द गढ़ता हूँ,
है जो तुमसे मुझमें मुहब्बत,
उसी को कागज़ पर समेटता हूँ…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Surgical Strike Ki Kavita

हमने कितना कुछ कहा नहीं,
आतंक कहो-कहाँ तक सहा नहीं,
पर पाक आतंक पोषने वाला है,
जाहिल है नहीं समझने वाला है।
होकर विवश हमने आज युद्ध चुना है,
तोड़ना है जो उसने नेटवर्क बुना है।

आज एअर फ़ोर्स ने भीषण हुंकार किया,
जैश-ए-मुहम्मद पर सर्जिकल स्ट्राइक किया,
तब थरथर-थरथर पाकी हुक्मरान डोले,
जब मोदी संकल्पित होकर बोले-
मैं देश नहीं रुकने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

यह देख आज हिन्द हुआ एक, साथ में है,
पूरा जगत हमारे विश्वास में है,
हमसे ही मंडी चाइना की,
हमारी ही अफगान-ईरान-ईराक में चलती है,
नए विश्व की आशा है हममें,
है नेतृत्व का साहस भी हममे।

तू असफल है, मुझे क्या ललकारेगा,
तू अनैतिक, कुपोषित ही मारा जाएगा,
जिन आतंकी विषधरों को पाला है तूने,
उन सबका अंत अब आएगा,
समय है अब भी लाज बचा ले,
अपने घर से तू आतंकी हटा ले..

अटल स्वप्न नहीं है तुमने माना,
मैत्री का मूल्य नहीं पहचाना,
तो ले, मैं सेना को अवसर देता हूँ,
उनको हर हमले की छूट मैं देता हूँ।
मन की बात नहीं अब सर्जिकल होगा,
हर आतंकी का टिकट कन्फ़र्म होगा।

-सन्नी कुमार

रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता रश्मिरथी से प्रेरित यह कविता जिसका उद्देश्य सिर्फ अपनी भावनाओं को उनके शब्दों भर में सहेजना और हमारे देशभक्त वीरों और माननीय प्रधानमंत्री जी का मान बढ़ाना है। आप सब की तरह मेरा भी जोश High है।
जय हिंद
सन्नी कुमार

Main desh nahi rukne doonga, main desh nahi jhukne doonga: PM Modi 

Today is the day when we must bow to our brave soldiers who made us proud and fought back so hard that even Pakistani Government(Read it Terrorists Group) are not in a situation to accept it. Our soldiers are shield and they have done their job so brilliantly that today every Indian is proud of this new India whose Josh is High.

We must appreciate every Indian be it farmers or traders every Indian was united after Pulwama attack and demanded government to do Surgical strike again and today early morning Indian Air Force has dropped more than a 1000KGs of explosive on a JeM terrorist base. It is a bold and brave step by our government. Today we must stay strong and support the strong leadership of our Country and the selfless man who feels and lives for the nation. He who addressed nation and assured again that Nation is in safe hand and secure.

I remember before elections one of his hindi poetry was so famous, “Mai desh nahin rukne dunga” and today he recited it again and even thousands of people have read it on my blog but I want to share few words from Rashmi rathi by Rashtrakavi Dinkar.

हमने कितना कुछ कहा नहीं,
आतंक कहो कहाँ तक सहा नहीं,
पर पाक आतंक पोषने वाला है,
जाहिल नहीं समझने वाला है।
हो विवश हमने आज युद्ध लड़ना है,
देशभक्त वीरों को आज फिर लड़ना-मरना है।

तभी आज IAF ने भीषण हुंकार किया,
जैश-ए-मुहम्मद पर सर्जिकल स्ट्राइक किया,
थरथर-थरथर पाकी हुक्मरान डोले,
मोदी संकल्पित होकर बोले-
मैं देश नहीं रुकने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा…

यह देख आज हिन्द हुआ एक, साथ में है,
पूरा जगत हमारे विश्वास में है,
हमसे ही मंडी चाइना की है,
हमसे ही अफगान-ईरान-ईराक की बनती है,
नए विश्व की आशा है हममें,
है नेतृत्व का साहस भी हममे।

तू मुझे क्या ललकारेगा,
तू अनैतिक, कुपोषित ही मारा जाएगा,
जिन आतंकी विषधरों को पाला है तूने,
उन सबका अंत अब आएगा,
समय है अब भी लाज बचा ले,
अपने घर से तू आतंकी हटा ले..

अटल स्वप्न नहीं तुमने माना,
मैत्री का मूल्य न पहचाना,
तो ले, मैं सेना को अवसर देता हूँ,
उनको हर हमले की छूट मैं देता हूँ।
मन की बात नहीं अब सर्जिकल होगा,
हर आतंकी का टिकट कन्फ़र्म होगा।
रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता रश्मिरथी से प्रेरित यह कविता जिसका उद्देश्य सिर्फ अपनी भावनाओं को उनके शब्दों भर में सहेजना और हमारे देशभक्त वीरों और माननीय प्रधानमंत्री जी का मान बढ़ाना है। आप सब की तरह मेरा भी जोश High है।
जय हिंद
सन्नी कुमार

आम और पीपल के छाव अब स्कूलों में नहीं मिलते

आम और पीपल के छाव अब स्कूलों में नहीं मिलते,
कैफेटेरिया का चलन नया है पर यहां चनाचुर नही मिलते,
वक़्त के पाबन्द आज भी है स्कूल,
पर पुरानी घण्टियों के धुन नहीं मिलते…

श्यामपट्ट गोरी हो गई पर वो चॉक नहीं मिलते,
ICT और Plagiarism का बढ़ा है क्रेज़,
तभी किताबों में अब मोरपंख नहीं मिलते..
कक्षा में सब है पर ‘सर’ को ‘गुरुजी’ जैसे मान नहीं मिलते…

एकलव्य है या नहीं ढूंढो कि आयोदधौम्य को शिष्यों पर आज हक़ नहीं मिलते,
बैठक के तरीकों पर है जोड़ पर आज खुली हवा में वर्ग नहीं लगते,
पढ़ाने की शैली पर भी खूब हुआ है शोध,
पर कौशल ज्ञान पर हो सके जोड़, उस अनुकूल गुरुकुल के परिवेश नहीं मिलते…

लकड़ी तोड़ते कृष्ण,
मेड़ पे लेटे आरुणि,
भिक्षाटन करते राम,
अर्थात एक्सपीरिएंसल लर्निंग का कांसेप्ट तो हुआ है हिट,
पर आज जिनके वाकई मतलब हो,
वो एक्सपीरियंस नहीं मिलते…

आम और पीपल के छाव अब स्कूलों में नहीं मिलते,
कैफेटेरिया का चलन नया है पर यहां चनाचुर नही मिलते,
वक़्त के पाबन्द आज भी है स्कूल,
पर पुरानी घण्टियों के धुन नहीं मिलते…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’
#hindi #Kavita

क्या लिखूं

कलम क्रोधित हो पूछती है कि क्या लिखूं,
वीरों की अद्भुत शहादत लिखूं,
या माँओं की बिलखती ममता लिखूं,
साथियों के उबलते जज्बात लिखूं,
या संगिनी की टूटी उम्मीद लिखूं,
राष्ट्र ने खोये है आज फिर जो सपूत,
कहो किन शब्दों में उन लालों के कर्ज लिखूं…

स्याही और गाँधी वचन आज ख़ारिज हो गए,
है दौर लहू का क्या लिखूं,
जो सरहद पर है वीर सचेत,
मैं हर एक को सैल्यूट लिखूं,
हमसे अहम थे जो हमने गंवा दिए,
उनके मन की तुमसे मांग लिखूं,
सेना के अब और न बांधो हाथ लिखूं,
घाटी को दो करने साफ या इन्हें हटा लो साफ लिखूं..
-©सन्नी कुमार

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