अल्पसंख्यकों से विश्व का बर्ताव

इराक में कूर्द,
पाकिस्तान में हिन्दू,
कश्मीर में पंडित,
म्यांमार में मुस्लिम,
जर्मनी में यहूदी,
अरब में काफ़िर,
अल्पसंख्यक है,
इनसे व्यवहार कैसा है,
वहां कानून कैसा है,
जिस दिन इन मुद्दों पर बहस हुई पता लग जायेगा कि जिस जन्नत की बातें पाक किताबों में है, वह मादरे वतन हिंद है, जिसने विस्थापितों को जगह दिया, मान-सम्मान दिया, वो चाहे जर्मनी के सताए यहूदी हो, या ईरान के पारसी, या पाकिस्तान-बंग्लादेश का राजनैतिक विस्थापित, इस मुल्क के आध्यात्मिक सोंच ने बौद्ध और जैन जैसे महान धर्म दिए जिनके ईकोसिस्टम को समझने की आज जरूरत है। आप जिस भाईचारे की, शांति की बात करते है उसकी प्रेरणा पूरे विश्व मे भारत जैसे देश ही देता है जहाँ कुछ टुच्चे पत्तलकार, चाटुकार और अपनी राजनीति चमकाने वाले चौधरी अल्पसंख्यक को उकसाना चाहते है, पर यह देश अगर अल्पंसख्यक का विरोधी होत तो यह देश टाटा को खो चुका होता, मनमोहन सिंह जी जैसा प्रधान न पाता, कलाम साहब ने जितना इसकी सेवा की, जिस सेक्युलर फैब्रिक को वो ओढ़ते थे वह मिसाल है, इरफान पठान और नवाजुद्दीन सिद्दकी बताये कब कब भेद हुआ उनसे, मेरे दोनो ही फेवरिट है, बाबा साहेव प्रवर्तित बौद्ध थे, उनको इस देश का संविधान गढ़ने दिया और उनका भी सम्मान करते है। आज कुछ सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों से बाहर आने का एक लक्ष्य जिसपे देश और हम अग्रसर है फिर ये हर बार माइनॉरिटी को भरमाने की क्या आवश्यक्ता?? अपना ही उदाहरण देता हुँ शुक्रवार को हाफ टाइम में छुट्टी लेने वाले सहकर्मियों के बीच मे रहा हूँ, उनकी सेवई खाई और जब उन्होंने दीवाली का लड्डु नहीं खाया तो ठगा हुआ महसूस हुआ पर इसको कितना ढोए, हम भी नफरत करे जबकि वही बहुत से और भी थे जो बैलेंस बलाना जानते थे…इसी बैलेंस को बनाये रखेंगे थोड़ा इतिहास खुद पढेंगे, तो आपको समझ आएगा कि 56 देश जो इस्लामिक है वहाँ अन्य देशों के लोगो को को यहाँ तक कि मुसलमानों को क्या हक़ मिले है, वहाँ महिला अधिकार कितने है, पर नहीं आपकी नजर इज़राइल पर है, फिलिस्तीन की चिंता में आप मुंबई उजाड़ देते है पर आप ईरान इराक़ और सीरिया पर चुप है और फिर सेव गाज़ा सेव रोहिंज्ञा के लिए सड़कों पर है। एक ओर आप 370 के विरोध में है कि कश्मीरियों के अधिकार सीमित हो जाएंगे पर पंडितों को भूल गए, खुद राहुल बाबा भी कश्मीर से अमेठी और अब तो केरल सेटल हो गए. क्या उनपर जुल्म नही हुआ?? खैर ये राजनीति है हम और आप बैलेंस कैसे बनाये इस पर सोंचे, एक समाज बाहरी मुद्दों पर कभी तख्ती नही उठाता और आप अगर जागरूक लोग है और वैश्विक मुद्दे भी उठाते है तो प्लीज कुर्दों की भी आवाज बनिये, सीरिया को भी बचाइए, अपने देश के अच्छे चीजों के लिए भी धन्यवाद दीजिये, अल्पसंख्यक कोटा में हुए वृद्धि को सराहिये, और प्लीज CAB, NRC जिसका भी विरोध या समर्थन करना है करे पर ट्रेनों पर हमला करना, एम्बुलेंस को निशाना बनाना, पुलिस के खदेड़ना शोभता है, और जब वही पुलिस पेल दे तो मजलूम हो जाना यह सही है? हम और आप बुद्धिमान बने, हम किसी मैग्सेसे की होड़ में नहीं है, गुजरात हो या गोधरा, कश्मीर 1990 का हो या 2019 का, बर्बाद हमलोग होएंगे क्योंकि Primetime वाला पत्रकार या हमारा कोई नेता लाठी नहीं खायेगा, इसलिए बैलेंस बनाये, हमारी सुरक्षा हमारी भी जिम्मेदारी है, CAB को पहले समझिए फिर समर्थन और विरोध तय कीजिये, भारत को कम्युनल बनने की राह में धकेलने से बचे यह सबकी जिम्मेदारी है!
सन्नी कुमार
मुझे आप अपने नजर से देखने के लिए स्वतंत्र है, पर एक आग्रह भी है कि खुद को भी कभी अपनी नजर में तौलिए, सब बुझ जायेगा..

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