बाल दिवस पर कविता

बाल दिवस

तुम ख़ुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आये,
तुम उम्मीदें इस आँगन की,
जिसे बढ़ता देखना सब चाहे।

तुम गीली मिट्टी के वो मानस हो,
जो चाहे खुद में बन जाओ,
हर ज्ञान तुम्हारे अंदर है,
जो मर्ज़ी बाहर ले आओ।

तुम खुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आओ।

हर आशीष तुम्हें, हर साथ तुम्हें,
तुम अपनी जिंदगी जी भर जी जाओ,
पढ़े किताबें दुनिया तुम्हारी,
ऐसी एक सहज कहानी लिख जाओ।

सफ़ल-असफ़ल सब मिथ्या है,
हे अर्जुन! अपना कर्म बस कर जाओ,
है तुमसे यह धन्य धरा,
तुम इसे अपने रंगों से रंग जाओ।

तुम खुशियों के जो बादल हो,
आज बरसो सावन ले आओ।

आपका
सन्नी कुमार अद्विक

Wish you all a happy children day आप सब में जो बचपन समाया है उसे जश्न के हजारों अवसर मिले यही कामना।

4 thoughts on “बाल दिवस पर कविता

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  1. “सफ़ल-असफ़ल सब मिथ्या है,
    हे अर्जुन! अपना कर्म बस कर जाओ,
    है तुमसे यह धन्य धरा,
    तुम इसे अपने रंगों से रंग जाओ।

    तुम खुशियों के जो बादल हो,
    आज बरसो सावन ले आओ।”

    दिल को छू गई ये पंक्तियां। उत्तम रचना 👌👌

  2. हर आशीष तुम्हें, हर साथ तुम्हें,
    तुम अपनी जिंदगी जी भर जी जाओ,
    पढ़े किताबें दुनिया तुम्हारी,
    ऐसी एक सहज कहानी लिख जाओ।
    सफ़ल-असफ़ल सब मिथ्या है,
    हे अर्जुन! अपना कर्म बस कर जाओ,
    है तुमसे यह धन्य धरा,
    तुम इसे अपने रंगों से रंग जाओ।
    बहुत खूब!

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