कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल

कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल क़िस्सों में बदल जाएंगे,
बदलाव की आंधी से डर मांझी जब कहीं और वो लंगर डालेंगे,
यह मोड़ जो मंजिल सी प्यारी हो गई थी,
कल नये शग़ल, नई कोशिशों में पीछे छूट जाएंगे..
एक अज़नबी शहर के, कई दिलों में घर बन रहा था मेरा,
कल दूरियों की बर्फ़ में शायद हम बाहर कर दिए जाएंगे,
हसरत अब भी है कि सबकी मुस्कुराहटों में बना रहा हूँ, पर अफसोस कल आंसुओ की बारिश में अपनों से दूर हो जाएंगे..
कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल,
क़िस्सों में बदल जाएंगे।

आसान नहीं था मेरा गोएनकन हो जाना,
ज्ञान की धरा पर यूं गुरु शिक्षा सम्मान पा जाना,
पर यह परिवार, यह सम्मान देने वाला शहर, कल में याद बनकर रहकर जाएंगे,
सीखता-सीखाता जिस आँगन को अपना माना था,
कल वहाँ के खिलते ख़्वाबों से हम महरूम हो जाएंगे,
स्वागत हुआ था नवम्बर 15 को एक बड़े मंच पे जगह देकर,
अक्टूबर 19 में वहीं से एक पल में विदा हो जाएंगे..
कल जिंदगी के कुछ अनमोल पल, क़िस्सों में बदल जाएंगे।

आसान नहीं होता कहीं इतना, स्टाफ़ रूम में मित्रों का मिल जाना,
बिना हिचक के काम बांट यूं मिनटों में निपटा लेना,
कल यही साथ यही विश्वास हमसे रूठ जब जाएंगे,
नए ठौर की तन्हाइयों में फिर इन भावों की गर्माहट से अलाव जलाएंगे,
धन्य है यह गोयनका हमारा, सारे जहां को हम बताएंगे।

आसान नहीं होता कहीं इतना, स्टाफ़ रूम में मित्रों का मिल जाना,
बिना हिचक के काम बांट यूं मिनटों में निपटा लेना,
कल यही साथ यही विश्वास हमसे रूठ जब जाएंगे,
नए ठौर की तन्हाइयों में फिर इन भावों की गर्माहट से अलाव जलाएंगे,
धन्य है यह गोयनका हमारा, सारे जहां को हम बताएंगे।

आसान नहीं होता हंसों में मुझ बगुले का यूं मिल जाना
रोज बदलते चेहरों में कुछ देर अपने मूल्यों पे टिक जाना,
बकैतों की भीड़ में कम शब्दों में सब कह जाना, रैंचो बन प्रधान के मन को भा जाना,
हर्षित करता है बड़े साहब का मुझमे जोश बढ़ा देना,
कभी ज्वालामुखी कभी डायनामाइट, कभी मुझ अनुज को गले लगा लेना,
आसान नहीं होगा आपके सपनों से यूं कट जाना,
लीजेंड सर की प्लानिंग और execution का हिस्सा न हो पाना,
सैनिक शिक्षक किसान को लेकर आपके विचारों को न सुन पाना,
पर मेरे नाट्य आपकी बातें, अभिषेक जुविरिया की कोशिश कल में भी सराहे जाएंगे,
जब भी होगा पन्द्रह अगस्त वह मंचन, वह बातें मुझे रुलायेंगे,
एक टीस रहेगी क्यों उस दिन विशेष अंग्रेजी थीम था थोपा,
पर सीखने में सब जायज सो गलती मान खुद की हम कर लेंगे,
जिनको भी करना हो गुस्सा करे, हम सही कर जाएंगे,
आप से हो या बच्चों से सही वक्त सराहे जाएंगे,
कल जो होंगे दूर हम आप हमें हम आपको याद आएंगे,
कल जिंदगी के कुछ अनमोल पन्ने,
क़िस्सों में बदल जाएंगे।

कल यह साफ नियत की कड़वी बोली,
इन चहारदीवारीयों में फिर गूजेंगे,
टेबल नम्बर वन के बन्दे कब सही सराहे जाएंगे,
हाँ जी हां जी के शोर में अभी और कितने प्रीटेंडर आएंगे,
कहने को बहुतों शब्द है पर क्यों कहे जब जाया कर दिए जाएंगे,
आखिरी प्रेम मेरा आप सबको,
जाते-जाते एक लिटमस देकर जाएंगे,
जो सीखा आप सब से उसका आभार जता हम जाएंगे,
है मेरा भी चाह यही हो नम्बर 1 कैम्प्स हमारा,
सन्दर्भ उसी में एक कोशिश करके जाएंगे,
नबेन्दू-नीला-श्रुति-इमरान-जीशान संग,
फर्स्ट बैच अब चित्रों तक रह जाएंगे,
जय हो इस प्रांगण का सदा, जो है उनको शुभकामनाएं दिए हम जाएंगे,
जिंदगी के कुछ अनमोल पल, क़िस्सों में बदल जाएंगे।
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Thank You Everyone! Love

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