बनोगे तुम सबके आदर्श

बनोगे तुम सबके आदर्श,
गर तुम अपनी अलग नई लीक बनाओगे,
निज कर्म और चरित्रबल से,
निश्चय ही जीवन सफल कर पाओगे,
सफलता ही नहीं, तुम्हें देख सफलतम भी तब नत होगा,
जब समाज को साथ ले बढ़ने का तुम्हारा प्रण होगा।
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

मेरी अन्य कविताओं को पढ़ने के लिये मेरे ब्लॉग http://www.sunnymca.wordpress.com पर पधारे। आप यूट्यूब चैनल https://m.youtube.com/user/sunnykr999 पर भी मेरी कुछ कवितायें सुन सकते है। धन्यवाद। प्रणाम।

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जब न आराम मिला न रोज़

वही सुबह,
वही अलसाई शुरुआत,
वही थे बच्चे आज भी,
और वही सब शिक्षकलोग,
दिन पूरा वैसा ही जीया,
जैसे जीते है हर रोज..

वही कक्षाओं के बीच की दौड़,
वही लेसन, लेक्चर हर ओर,
कुछ अलग तो था पर वही तो था,
जैसा होता है हर रोज..

थी थोड़ी धीमी,
जैसी होती है हर शाम,
वही अद्विक, वही नटखटपन,
वही स्टेटस,
वही पाठकगण,
सार कहूँ तो,
सब रोज सा था,
कि जब न आराम मिला, न रोज़..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’
श्री श्री(रविशंकर नहीं) के मन की बात

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