Surgical Strike Ki Kavita

हमने कितना कुछ कहा नहीं,
आतंक कहो-कहाँ तक सहा नहीं,
पर पाक आतंक पोषने वाला है,
जाहिल है नहीं समझने वाला है।
होकर विवश हमने आज युद्ध चुना है,
तोड़ना है जो उसने नेटवर्क बुना है।

आज एअर फ़ोर्स ने भीषण हुंकार किया,
जैश-ए-मुहम्मद पर सर्जिकल स्ट्राइक किया,
तब थरथर-थरथर पाकी हुक्मरान डोले,
जब मोदी संकल्पित होकर बोले-
मैं देश नहीं रुकने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

यह देख आज हिन्द हुआ एक, साथ में है,
पूरा जगत हमारे विश्वास में है,
हमसे ही मंडी चाइना की,
हमारी ही अफगान-ईरान-ईराक में चलती है,
नए विश्व की आशा है हममें,
है नेतृत्व का साहस भी हममे।

तू असफल है, मुझे क्या ललकारेगा,
तू अनैतिक, कुपोषित ही मारा जाएगा,
जिन आतंकी विषधरों को पाला है तूने,
उन सबका अंत अब आएगा,
समय है अब भी लाज बचा ले,
अपने घर से तू आतंकी हटा ले..

अटल स्वप्न नहीं है तुमने माना,
मैत्री का मूल्य नहीं पहचाना,
तो ले, मैं सेना को अवसर देता हूँ,
उनको हर हमले की छूट मैं देता हूँ।
मन की बात नहीं अब सर्जिकल होगा,
हर आतंकी का टिकट कन्फ़र्म होगा।

-सन्नी कुमार

रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता रश्मिरथी से प्रेरित यह कविता जिसका उद्देश्य सिर्फ अपनी भावनाओं को उनके शब्दों भर में सहेजना और हमारे देशभक्त वीरों और माननीय प्रधानमंत्री जी का मान बढ़ाना है। आप सब की तरह मेरा भी जोश High है।
जय हिंद
सन्नी कुमार

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