मौसम है स्नेह के तेल चढ़ा लेना

गर सुख गया हो दीये सा मन,
मौसम है स्नेह के तेल चढ़ा लेना,
हो मन में कहीं गर लोभ-क्रोध का अंधेरा,
मौका है प्रेम के दिये जला लेना।

घर को, मन को, गर कर चुके हो साफ,
पड़ोस-पड़ोसियों से कचड़ा-क्लेश भी हटा लेना,
कब तक रखोगे रामायण में राम,
आज दिन है खुद में भगवान बसा लेना।

गर सुख गया हो दिये सा मन,
मौसम है स्नेह के तेल चढ़ा लेना..

गर पर्याप्त हो ढ़कने को तन,
किसी और की लाज बचा लेना,
है आज रात जो चाँद को छुट्टी,
उसके भरोसे जो है, उनको दीये दिला देना..

रहेगा न आज कोई कोना अंधेरा,
आप बस अपना दायरा बढ़ा लेना,
राम मिलेंगे आपसे झूम गले,
आप भरत के भाव बसा लेना..

गर सुख गया हो दिये सा मन,
मौसम है स्नेह के तेल चढ़ा लेना..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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12 thoughts on “मौसम है स्नेह के तेल चढ़ा लेना

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  1. गर सुख गया हो दीये सा मन,
    मौसम है स्नेह के तेल चढ़ा लेना,
    हो मन में कहीं गर लोभ-क्रोध का अंधेरा,
    मौका है प्रेम के दिये जला लेना।
    kya khub likha hai…..behtarin……Diwali ki hardik shubhkamnaye……Maa Lakshmi aapko sukh,smridhi aur shanti pradaan karen.

    1. धन्यवाद भैया, प्रणाम। आपको और आपके परिवारजनों को भी दीवाली की शुभकामनाएं

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