कविता मेरे हर शिष्य के नाम

यह कविता मेरे हर शिष्य के नाम, मेरे भाव, मेरे शब्द आप तक पहुंचे तो सूचित करें, अपने विचार रखें। धन्यवाद!

कोई कल्पित ख्वाब नहीं,
न गुरु सम्मान का अभिलाषी हूँ,
है तुम सबसे मेरा एक ही स्वार्थ,
तुम्हारे सफलता का मैं प्रार्थी हूँ..

कोई तुमसे मांग नहीं,
तुम स्वयं को समझो चाहता हूँ,
हो कदम तुम्हारे कल कीर्ति के सीढ़ी,
सो तुम्हें चलना आज सीखाता हूँ..

कोई कल्पित ख्वाब नहीं,
न तुमसे सुख-समझौते का अधिकारी हूँ,
है जो थोड़ी अनुभव और ज्ञान की पूंजी,
वह तुम सब संग बांटना चाहता हूँ..

कोई कल्पित ख्वाब नहीं,
मैं वास्तविकता का साक्षी हूँ,
कल को होगे तुम नीति-नियम रचयिता,
सो तुम्हें आज सही-गलत का भान कराता हूँ..

हो कुरुक्षेत्र पुनः यह दु:स्वप्न नहीं,
न कृष्णतुल्य एक कण भी हूँ,
पर यह जीवन भी है महान संघर्ष,
कि इसमें विजयी रहो मैं चाहता हूँ..

कोई कल्पित ख्वाब नहीं,
न गुरु सम्मान का अभिलाषी हूँ..
है तुमने जो भी मुकाम चुना,
उस यात्रा में मैं एक सारथी हूँ,
पा लो तुम सब अपनी मंजिल,
मैं यही कामना करता हूँ…

कोई कल्पित ख्वाब नहीं,
न गुरु सम्मान का अभिलाषी हूँ..
©सन्नी कुमार
#Happy_Teachers_Day
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#Teacher_on_Teachers_Day

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