समाज, सरकार और हम

मित्रमंडली में भोजपुर में हुए उस अन्याय की चर्चा हो रही थी, मेरा भी भावुक मन यह सोंच कर बैठा जा रहा था कि कितना संवेदनहीन, नपुंसक और लिच्चर हो गया है यह समाज जो खुलेआम एक औरत को नंगा करके पीटता है, और फिर मीडिया इसे खबर बनाकर, TRP और views के लिए मसाला की तरह परोस देती है।
यह सब विमर्श हो रहा था कि इस दौरान एक मित्र ने कहा कि यह सब सुशासन बाबू की नाकामी है और फिर इस घटना को मुजफ्फरपुर की घटना से जोड़ दिया, जो कितना सही है या गलत यह लोग तय करे, और वही लोग यह भी तय करे कि अगर समाज की कोई भूमिका है ही नहीं तो फिर ये समाजिक तानाबाना क्यों?
मेरी समझ में सरकार से ज्यादा भूमिका समाज की है, लोगों की है पर लोग और समाज भ्रस्ट है और तभी दोनों अपनी नपुंसकता को सरकार के माथे सजा देते है..पर ये इस तरह कब तक??
कबतक हम फूहड़ता, निर्लज्जता, नंगई, नपुंसकता और भ्रस्टाचार को ढोते रहेंगे? कब तक जाहिलों को माहौल बिगाड़ते रहने देंगे और फिर ये जाहिल भी तो हम ही है कोई एलियन आकर तो इधर चरस नहीं बोता, यो-यो वाली जो नश्ल तैयार होगी वो उड़ता पंजाब उड़ता बिहार ही बनाएगी और आप अच्छा कुछ कहेंगे तो वॉल्यूम बढ़ा के कह देंगे ‘कि अब करेंगे गन्दी बात’।
ये जो वॉल्यूम लाऊड करके थर्ड ग्रेड के गाने सुनते है और एक से एक फालतू 400 चैनल जो हमलोग टेपते है ये उसी का देन है कि हम ब्रेकिंग न्यूज़ सुनते तो है पर उसके इशारों को समझते नहीं..और यही सर्वाधिक स्थिति दुःखद है।
मैं बार बार कहता रहा हूँ कि आज का जनरेशन पर्सनालिटी डेवलपमेंट को लेकर अत्यधिक जागरूक है और कैरेक्टर बिल्डिंग को दरकिनार कर दिया है या यूं कहें की चरित्र निर्माण की जो नींव बालकाल में पड़ती है उसे किशोरावस्था में पहुंचते पहुंचते उखाड़ फेंकते है। आज की फास्टफूड जनरेशन को हवा में कैसल बनाना है वो भी दस रुपये के लिए सुट्टे से.. और दयनीय स्थिति यह है कि अगर आप उन्हें बुरा समझते है तो ये साबित कर देंगे(चाहे दलील जो भी हो) कि आपकी माइंड आज भी नैरो है।
ख़ैर, मुझे मेरे लिए इतना ही कहना है कि अच्छे लोगों को समाज के भरोसे नहीं रहना होगा बल्कि खुद को सुदृढ़ करना होगा, मजबूत बनाना होगा ताकि ऐसी किसी भी स्थिति को पैदा होने से रोकने की स्थिति में रहे।

इन शार्ट, समाज अब वह गिद्ध है जो सिर्फ मृत्युपरांत भोज के लिए बनी है…भोज खिलाये समाज खुश होके सरकार को दुगुनी ऊर्जा से गाली देने लगेगा।

खैर आपसे इन चार पंक्तियों के माध्यम से यही निवेदन कि

“जिंदा है तो मिसाल बनिये,
जिंदगी हो ऐसी की औरों के ख्वाब बनिये,
लिच्छड़, नपुंसक, भ्रष्ट-भेड़ियों की भेड़ में हो दहशत,
आप ऐसे महानायक भरत बनिये’
©सन्नी कुमार

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