बड़बोले मत बनिये!

गोलू शरीर से बड़ा था तो मोलू को हमेशा कम आंकता था, वहीं दूसरी ओर मोलू बहुत परिश्रमी था और गोलू को नजरअंदाज करता था। कल की ही बात है जब मोलू ने GPL में 52 रन ठोक दिए वो भी मात्र 23 गेंदों मे पर कप्तान गोलू उससे नाराज रहा और बदले उसकी सराहना करने के उसने सुना दिया ‘कि यार मोलू तुमने 5-7 गेंदे डॉट कर दी वरना और बेहतर मैच बनता’।
मोलू सा हाल ही उस भोली का भी है जो अपने दफ्तर में खूब काम करने के बाद भी सुनती है, और ये सुनना FM सुनने की तरह सुरीला नहीं होता। आज ही कि बात है उसके घण्टों के काम को किसी आरामपसंद बड़बोले ने मिनट भर का बता उसे कम आंक दिया पर आज तो मानो भोली भोली न थी कोई अंजना ॐ कश्यम थी जिसने तराक से पूछ लिया कि महाराज यूं तो दिल्ली एक घण्टे में जाया जा सकता पर क्या आप हेलीकॉप्टर उपलब्ध करा सकते है? मतलब ये कि अगर data सही होगा तभी information सटीक मांगेंगे आप, खेत में गुल्ली डंडा देकर कोहली बन जाऊं ऐसी डिमांड क्यों रखते है….?

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