हिरण को मिला न्याय

भारतीय होने के नाते हर निर्णय का सम्मान करता हूँ पर क्या कोर्ट को वाकई हिरण, शेर, बाघ जैसे जंगली जानवर से ही प्यार है, क्या इनको मारना ही, मात्र अपराध है?
गाय जैसे घरेलू जानवर के लिए न PETA बोलेगा न हम और न आप पर क्यों? दो पैर वाले जानवर(इंसानों) में भी जो बाघ (अलगाववादी) है, दहाड़ सकते है संरक्षण उन्हीं को मिलता है, जो हिरण है करोड़ो का कस्तूरी देते है वैसे नीरव को ही भागने दिया जाता है पर बेचारी गाय (गरीब टैक्सपेयर) जिसके बछड़े के हिस्से का दूध(कमाई का हिस्सा) भी तुम पीते हो, उसी को काटने का रिवाज़ क्यों है? क्यों उसके हक़ की बात नहीं होती है?
सब ठीक तो है इस दुनिया में जहां हर कोई खुद के सभ्यता और संस्कृति को श्रेष्ठ साबित करता है और ईश्वर के नियमों में यकीन रखने का दम्भ भरता है या हम आज भी पाषाणयुग के खानाबदोश भर ही है और सुधार बस इतना है कि आज हम सब लम्बी लम्बी हांक देते है, और सूट बूट झार लेते है?

क्या कानून गाय (टैक्सपेयर्स) के लिए भी वफादार हो जाये वैसे अच्छे दिन आएगा, या मुझे कल्पनाजीवी(utopian) कहके नकार दोगे तुम?

-श्री श्री (रविशंकर नहीं) सन्नी कुमार जी महाराज

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5 thoughts on “हिरण को मिला न्याय

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  1. bilkul sahi kaha…..pretyek jivon men ishwar ka waas hai…..chahe wah gaay ho yaa kaala hiran……pratyek chhote se chhote jeev men rab ka waas hai……agar iraadatan kisi ka bhi ham baddh karte hain wah paap hai magar ham insaan apne apne fayde aur sahuliyat ko dekhkar kaanoon banaa lete hain……..kahin gaay kaa badh hota hai to kahin kisi aur janwar ka …..becharon ka koyee apna kaanoon jo nahi hai………shayad esiliye hamare dharm men pratyek jeev ko kisi naa kisi devta se jodaa gaya hai taaki tab to insaan unpar raham karen.

      1. गरीबों की कोई जिंदगी नहीं चाहे वह किसी भी जाति का क्यों ना हो।

          1. बिल्कुल।
            कहीं दलित को स्वर्ण कहीं स्वर्ण को दलित,
            कहीं स्वर्ण को स्वर्ण,कहीं दलित को दलित,
            शोषण तो हर जगह इंसान का ही होता है जो कमजोर होता है।

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