इन आँखों को नम होने दूं न अभी

इन आँखों को नम होने दूं न अभी,
सफर में कई मोड़ आने बाक़ी है अभी,
सजा रहा हूँ तुम्हारे यादों को दिल में,
बस जुदाई मिली है, जिन्दा हूँ मैं अभी।

तुमसे बिछड़ कर एक पेड़ बनूंगा,
रास्ता मैं तुम्हारा रोज तकूँगा,
जिस रोज भी लौटी इस राह से तूम,
है वादा तुमको मैं बेहतर ही मिलूंगा।

तुम संग जो झूमती-गाती थी शामें,
वो जो महफ़िल थी उसे मुरझाने न दूंगा
वो चांद जो हमारा इन्तेजार था करता,
उससे तुम्हारी ही मैं बातें करूँगा।

याद आये तुमको जब भी मेरी,
मुस्कुराकर भुलाना हर शरारत मेरी,
है जिंदगी के दामन में कई और भी पन्ने,
होगा निश्चय ही मिलन उनमें हमारा कहीं।

इन आँखों को नम होने दूं न अभी,
सफर में कई मोड़ आने बाक़ी है अभी,
सजा रहा हूँ तुम्हारे यादों को दिल में,
बस जुदाई मिली है, जिन्दा हूँ मैं अभी।
©सन्नी कुमार

All words are for you my dear adorable khushboo Ma’am, but feelings are of multiple people. I have penned on behalf of all of them who are kanjus with words 😜. We all will always miss you mam.

Thank You and The Supreme Krishna. Love!

10 thoughts on “इन आँखों को नम होने दूं न अभी

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद मुझे पढ़ने व प्रतिक्रिया देने के लिए। प्रणाम। आपका दिन शुभ हो।

    1. धन्यवाद भैया। प्रेम ही इस सृष्टि के पोषण का सबसे अत्यावश्यक तत्व है और लोग जिनको हम अपना मानते है वो इस यात्रा को सुगम बनाते है।
      प्रणाम

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