जरूरी है मुहब्बत का होना

किसी से बिछड़कर मुझे, मिलने का हुनर है आया,
खोकर ‘खुद’ को मैंने, मेरे खुद को है पहचाना..
वो एक थी कभी जिसके, अरमां दिल में बसते थे,
आज उसी के अक्श को मैंने, जर्रे-जर्रे में है बसाया..
नहीं खबर ये मुहब्बत है या कोई नई दीवानगी,
पर सच है लगता मुझे अब, निर्मोही मोह समझ आया..
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खैर किसी से बातों-बातों में, कुछ बातें निकली थी,
था चर्चा मुहब्बत का सो, दिल भावों से पिघला था,
उकेरे जो मन के भाव उसने, उसे शब्दों ने सहेजा था,
कि उसने पूछा जब मुहब्बत का परिचय,
मैंने कुछ ये सब कह डाला था….
“ये मुहब्बत ही तो है जो जीना सिखलाती है,
हर रात ख्वाबों में बहलाकर, उम्मीदों का सवेरा ले आती है…

मुहब्बत आँखों का हो या भावों का,
जज्बातों का या ख्यालातों का,
ये मुहब्बत चाहे जैसा हो, जिससे हो,
करने वाले को खूब बनाती है,
छूट जाए गर मीत तो ये शायर बनाती है,
और जो मिलन हुआ मुहब्बत में तब,
जिंदगी जन्नत बन जाती है,
बड़ा जरूरी है मुहब्बत का होना,
कि ये आदम को इंसान बनाती है।”
-सन्नी कुमार

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17 thoughts on “जरूरी है मुहब्बत का होना

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  1. बेहतरीन लिखा है।
    मिलन हुआ मुहब्बत में तब,
    जिंदगी जन्नत बन जाती है,
    बड़ा जरूरी है मुहब्बत का होना,
    कि ये आदम को इंसान बनाती है।”

  2. बहुत ही बेहतरीन article लिखा है आपने। Share करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙂 🙂

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