कोई करिश्मा तुझमें है

ऐसा क्यूं है कि जो खोया था कभी उसका अक्स तुझमें है,
ये मुहब्बत की आदत मेरी है या कोई करिश्मा तुझमें है…
-सन्नी कुमार
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क्या इंसान भी फलों सा होता है?
जो बाहर से ज्यादा मीठा वो अंदर से सड़ा होता है??
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तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
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क्यूं संवरती हो उस आईना को देखकर,
संवरा करो तुम इन आँखों में झांककर,
आइना जिससे मिले उसी का हो जाता है,
और ये आँखें है जो सिर्फ तुमको बसाता है..

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14 thoughts on “कोई करिश्मा तुझमें है

  1. क्यूं संवरती हो उस आईना को देखकर,
    संवरा करो तुम इन आँखों में झांककर,
    आइना जिससे मिले उसी का हो जाता है,
    और ये आँखें है जो सिर्फ तुमको बसाता है..

    गहरी बात है वाह
    आप जैसे कलम के साधक मेरे ब्लाॅग पर भी अपनी टिप्पणी दें तो बड़ा अच्छा लगेगा 😊

    • अवश्य पढ़ेंगे आपको… फिलहाल आभार स्वीकारे, बहुत जमाने बाद लोगों ने मुझे पढा है 🙂

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