यही एक फरियाद करता हूँ..

IMG-20170327-WA0004ये खबर अब मुझे भी नहीं,
कि मैं तुमसे क्या कुछ कहता हूँ,
जब आती हो सामने तब,
कब मैं होश में रहता हूँ…

चाहता हूँ कहूं तुमसे वो सब,
जो तुम्हारी आँखों में पढता हूँ,
पर कहो कैसे कहूं,
जो तुम्हारे सामने निशब्द होता हूं…

भाता है मुस्कुराना तुम्हारा,
तभी वे लम्हे नज़रों में कैद करता हूँ..
मुस्कुराओ हरवक्त अब तुम,
ऐसी कोशिश करता हूँ…

मैं  कहूं और तुम सुनो,
ऐसे ही ख्वाब रखता हूँ,
शब्द मेरे लुभाते नहीं शायद,
सो अपनी खामोशी से भी उम्मीद रखता हूँ,
बयां हो जाए मुझसे हाल-ए-दिल,
यही एक फरियाद करता हूँ..
-सन्नी कुमार

[This poem is for someone special who makes me feel good n supporting like a good friend. Gem u already knw it’s(all d lies) for u]

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10 thoughts on “यही एक फरियाद करता हूँ..

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