मदर’स डे विशेस

कल फेसबुक पे नहीं था क्योंकि घर में था, अपने बेटे के पास मेरे पापा के साथ, साथ में उसकी माँ भी थी और मेरी माँ भी… इतवार अच्छा गुजरा, मैंने मदर डे की जानकारी नहीं थी न फेसबुकिया इमोशन जागा था पर जब भाई ने माँ को सुबह-सुबह फोन किया तब मालुम हुआ… खैर मैं ढीठ हूँ मैंने उसके बाद भी माँ को कुछ नहीं कहा, बस उसके साथ हमेशा की तरह चिढ़ना-चिढ़ाना करता रहा… जब अकेले में, अपने कमरे में आया तो बीबी ने आकर समझाया की आज तो पूरी दुनिया माँ को सिर्फ मान दे रही है, आप आज भी बच्चों की तरह कर क्यों रहे हो, ये बेवजह की चिढ़ना, चिढ़ाना क्यों?…मैंने बिच में ही टोकते हुए कहा कि मैं आज भी उसका बच्चा ही तो हूँ और जैसे तुम्हारे अद्विक को तुम्हे कुछ बताने के लिए शब्द नहीं चाहिए, मुझे भी नहीं चाहिए.. माँ के साथ हूँ, माँ सब समझ रही है… तभी उसको माँ ने बाहर बुलाया, शायद वो हमे सुन गयी थी.. अब वापिस जब मेरी बीबी आयी तो बोली की माँ को मार्किट जाना है… लो अब तो मैं और चिढ गया कि यार शाम में मुझे वापिस गया जाना है और इस धुप में बाहर! पर माँ ने कहा था तो मैंने हामी भरी, तुरत तैयार होकर बाजार के लिए निकले और फिर माँ एक घड़ी के दुकान में लेकर गयी, बोला की प्रीती के लिए घड़ी देखनी है मुझे anniversary गिफ्ट का सुझा कि अभी ही ले रही , पर उधर जा कर उसने मेरे लिए घड़ी खरीदी, बाद में कहा कि प्रीती के लिए अगले सन्डे जब आओगे तब ले लेंगे…
जब घर पहुंचे और सबको मिठाई दी तो बीबी बोली कि खूब हो आप तो, मदर डे पर बस मिठाई? मम्मी को तो कुछ अलग दीजिये, फिर मैंने चिढ़ाते हुए अपनी घड़ी दिखाई….. और त्वरित कमेंट आया कि आपका सिर्फ इनकमिंग है…. हम दोनों नोक झोंक में उलझ गए और माँ मुस्कुराते हुए चली गयी और फिर उसने सबको मिठाई, समोसा दिया.

शाम में जब घर से निकल रहा था, उसके जब पाँव छुए तो फिर 100 रूपये का नोट जेब में डाल दी…हम बोले की कल सैलरी आ जायेगी माँ, वो बोली नहीं आती तो 100 रूपये में जी लेता क्या? दोनों हंसे और फिर मैं घर से गया के लिए निकल गया।

अब रात में 1 बजे जब गया पहुँच गया तब जाकर घरवालों को नींद आयी, पर बीबी को तब भी चैन नहीं थी, बोली अगली बार जब आप आएंगे मैं और आप दोनों चलेंगे और कुछ मम्मी के लिए खरीदेंगे.. हम मुस्कुराये बोले हम तो सिर्फ इनकमिंग है, हाँ अगर तुम कुछ कांफ्रेंस टाइप करा दो, तो जरूर चलेंगे.. उ बुझी नहीं हम बुझाए नहीं पर मेरी और अद्विक दोनों की माँ, और सबकी माँ बच्चों को बुझती है भले शब्द हो या निशब्द… मेरा अद्विक मुझे वो सब याद दिला रहा जो मुझे कभी याद नहीं था, आज जान रहा हूँ की बच्चे कैसे अपने माँ को उसकी धड़कन से, उसके शरीर के गर्मी से जान लेता है और कैसे एक माँ पूरी रात जगाकर अपने बच्चे को फीड करती है पर नाराज नहीं होती, न किसी को खबर होने देती की उसको रात भर जगना परा. अबये भी जान रहा हूँ की एक बच्चे और माँ दोनों का जन्म भी एक ही दिन होता है दोनों के लिए हर दिन विशेस है.

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9 thoughts on “मदर’स डे विशेस

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  1. सोशल मीडिया के नाम पर हम सिर्फ हल्ला मचाने में मशगूल हैं, ये सोचे बिना कि कुछ ऑंखें हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं।

    1. मालूम नहीं भैया पर आजकल मैं खुद ही चीजों को स्पस्ट नहीं समझ पा रहा

  2. बहुत सुन्दर लेख… बिल्कुल सही माँ और बच्चे के रिश्ते मे हर दिन विशेष ही होता है

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