मैं शर्मिंदा हूँ

वह गरीब की बेटी थी और शर्म इस बात का है की जीते जी सुरक्षित न रख पाने वाला कानून उसके मरने के बाद भी उसको इंसाफ न दे पाया. अब बारी परिवार की है, समाज की है…आंसुओं से कुछ नहीं होगा, बुराई चरम पर है, कायर मत बनो, सीख दो, सम्भाल लो समाज को, सही सन्देश दो..गीदर को पीट पिट कर मार देते है और जबतक मार नहीं पाते है इसको हर रोज मारते है.. इसकी फोटों चिपकाओ, इस हरामी की जो भी मदद करें उसका बहिष्कार करो… अगर नहीं करोगे तो अगली निर्भया तुम्हारी बेटी हो यही प्रार्थना यही श्राप.. दिल्लीवालों कह दो की साथ हो और शर्मिंदा भी…

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3 thoughts on “मैं शर्मिंदा हूँ

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  1. बेटा सन्नी, कभी कभी सांस भी ले लिया करो! एक ही सांस में बोले जाते हो, थोडा समझना भी कठिन हो जाता है. इतना तो जरुर है कि तुम बेटी निर्भय के काण्ड, और उसपर हमारी निकम्मी अदालतों से, सही में कहें, तो तिलमिला रहे हो.

    भई, मैं भी इसमें तुम्हारे साथ हूँ. मैंने पहले ही इस बात पर काफी लिख डाली है, ब्लॉग, फेसबुक व ट्विटर पर. एक और लेख तैयारी पर है.

    मुझे गर्व है तुम पर. डटे रहो. पर याद रखना, दोष, जैसा कि तुम कहा रहे हो, जनता पर है, जो जनखों की तरह जी रही है. इस स्तिथि के बदलने में काफी समय लगेगा.

    प्यार व आशीर्वाद.

    1. dhanywaad sir 🙂 आप लोग बड़े है, लिखिए लोगों को सम्वेदनशील बनाइये, अपने अनुभव हम बच्चों से साँझा करिए तभी कुछ होगा..वरना नफरत, रोष बहुत बधा है और मनुष्यता कम हुयी है…हम सब ही परेशान है और हम ही परेशानी के कारण..इस चक्रव्यूह से बाहर आना होगा…सुझाए, समझाये.

      1. तुम्हें भी धन्यवाद, मेरे सन्नी!

        मेरी आँखों में मनुष्यता कम नहीं हुई है. …अधिक विचलित न हों.

        न केवल भौतिक रूप से, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी विश्व आगे ही बढ़ रहा है.

        शांति. प्यार एवं आशीर्वाद.

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