काफ़िर की सोंच

कमलेश तिवारी ने गलत तार छेड़ा है, गलत बात कही है, किसी के धर्म का उपहास गलत है, खासकर तब जब समूचा धर्म व्यक्तिविशेस पर टिका हुआ है…बहुत गलत।
मुसलमानों, आपके आसमानी किताब के अनुसार मैं एक काफ़िर(मुहम्मद को न मानने वाला) हूँ पर आज आपके साथ हूँ। आपसे सहानुभूति है, और इस सहानुभूति की वजहें कई है.. सबसे पहले तो ये की आप अपने धर्म को खूब मानते हो बल्कि देश से और सबसे ऊपर मानते हो। गर्मी हो, बरसात हो या ठिठुरता शर्द, बाजार में हो, गाँव में, ट्रेन में या खेत में आप डेढ़ बजते ही मस्जिद के हॉर्न बजने का इन्तेजार करते हो और फिर जहाँ जगह मिले आसन टिकाकर उपरवाले को याद करते हो। कई बार अजीब भी लगता है जब गर्मी के दिनों में सड़कों पर आपको सड़क छेंक उपरवाले को याद करते देखता हु, बड़े वफादार हो आप सब। वफादारी ही तो है की कुछ लोग उपरवाले को याद करते करते खुद को बम से भी उड़ा देते है और अपने टिकट पर कई काफिरों का या गैर फिरकों का भी उपरवाले से मीटिंग करा देते है। वाक़ई समर्पण के मामले में आप मुझ से आगे हो, मैं तो फर्जी आस्तिक हूँ बस खुशियाँ मनाता हूँ पर आपलोग अपने त्योहारों में खुद को ही जखमी कर लेते हो और फिर बिना इस बात के परवाह किये की राष्ट्रगान/राष्ट्रगीत न गाओगे तो लोग गलियां देंगे, आप दीन के होते हो। देश तो प्राथमिकता था भी नहीं कभी तभी एक अलग देश जिसका आधार भी आपका इमान आपका धर्म था अलग बनवा लिया..और कइयों के जड़े, नाते अबी भी वही है जो अक्सर नजर आ जाते है।
खैर, आज जब आपलोग अपने इमान को बाकियों से बेहतर जी रहे हो तो ये कमलेश टाइप लोग टिपण्णी कर देते है.. तिवारी सरीखे लोग इमान को भी शायद काफिर बुझने की भूल कर बैठते है, की जैसे काफ़िर गौ माता गौ माता चिल्लाएगा पर कसाई को देख भाग जायेगा.. इनको पता नहीं की चार्ली हेबडो के उस पत्रकार का क्या हुआ, इनको पता नहीं तसलीमा नसरीन और सलमान रश्दी का क्या हुआ..
खैर मुझे आपसे न केवल सहानुभूति है बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी विश्वास है कि क्या हुआ जो आजम, ओवैसी का कुछ न बिगाड़ सके, मकबूल हुसैन का कुछ न कर सके पर कमसे कम तिवारी का तो कुछ करे.. ये कोई बात हुयी की किसी के धार्मिक भावना को भड़काए? वो भी दुनिया के इकलौते इमान वाले सच्चे धर्म के पूजनीय पर टिपण्णी?? अदालत जल्द सजा दे यही आशा, बाकी आप लोग का अपना नेटवर्क भी है ही, ISI, ISIS और न जाने क्या क्या.. और अब तो इनाम की घोसना भी कर ही चुके हो, तो बस अब किसी फियादीन  तक खबर पहुंचने भर की देर है, कसाब, अफजल याकूब की कमी थोड़े है ईमान को…
आपका काफ़िर पड़ोसी

Advertisements

One thought on “काफ़िर की सोंच

Add yours

Feedback Please :)

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: