बिहार, आज तुमसे शर्मसार हूँ

पीढियां याद करेंगी तुमको,
जो रणवीर कहाते थे।
दिनकर को पढ़ पढ़ कर भी,
जो शुप्त नित सो जाते थे,
बुझ न पाये आज स्वार्थबन्धन को,
जो हर क्षण चाणक्य पे इतराते थे।
आज फिर है वहीं अंधेर कोठरी,
जहाँ बुद्ध, ज्ञान बाँट कर आते थे।
हताश हूँ, निराश हूँ,
हूँ इतिहास,
आज वर्तमान तुमसे शर्मसार हूँ….
-सन्नी
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31 thoughts on “बिहार, आज तुमसे शर्मसार हूँ

      • आभार आपका…
        पर मैं नहीं चाहूँगा की मुझ आगेे ऐसा कुछ लिखना पर.. एक बात बताइये कहीं मैं गलत तो नहीं सोचता न?

      • It hardly matters who wins and loses in elections (India is already very corrupt)…no point in disturbing your peace of mind on that. You should first enjoy your writing and connecting with others.

      • बेवकूफ है ये शांति अगले दो तीन दिन तो आने से रही पर भैया आपने जो कहा उसपर अमल करूँगा… जीतते तो नेता और हारे तो हम लोग..
        समझ नहीं आता लालू जो जेल से निकले थे उनके प्रचार को लोगों ने सुना और मोदी को ठुकराया.. एक बिहारी हूँ और आज बिहार को समझ नही पाया

      • सही कहते तो लोग सुनते.. किसी ने न सूना सब मगन थे अपने बिरादरी को जिताने में.. मुझे बिरादरी समझ ही नही आता…शायद बच्चा हूँ अभी जमीनी सच नहीं जानता, किताबों के शब्दों को आत्मसात करके भूल हुयी है 😦

      • sahi baat se mera matlab tha ki jo jeete hai wo ab janta ki bhalai karen to kuchh baat bane. Abhi bhi sabak nahi lenge to aage nahi jeetenge. biradriwad hi to duba raha hai desh ko.

      • देश अपने इतिहास से कभी नहीं सीखा.. यहां के इतिहासकार बस कहानियाँ गढ़ते रहे, सबक समझाना भूल गए.. आजादी के 68 साल बाद भी अगर हम जात पे चुनाव जीतते है, अगर हम वैसे व्यक्ति को स्वीकारते है जिसे न्यायालय ने सजा दी हो तो सोंचने वाली बात है।
        पिछली बार मैंने भी नितीश को वोट किया पर जिस जंगलराज को हमनेदेखा था उसे, उसी के मुखिया को संजीवनी देना, बेतुका लगा.. हो सकता है ये समय कम पढ़े लिखे लोगों की है और राबड़ी, स्मृति ईरानी के बाद अब तेजस्वी और तेजप्रताप की लॉटरी लगी है, पर बुद्धिजीवी का तमगा लेकर घूमने वालोन ने अब तक किया क्या था? एक युवा होने के नाते पूछ सकता हूँ की अबतक बिहार में हुआ क्या है और कौन सी मजबूरी थी की हमने स्वार्थबन्धन को जिताया..
        भाजपा के लोग भी सोंचे की फालतू के अगड़े पिछड़े के मुद्दे, आरक्षण के मुद्दे और घोसनाओं को पूरा करे, देश को जोड़े वरना आनेवाले समय में भारत के इतिहास में कई और दाग लगेंगे..

        प्रार्थना..नितीश की चले और लालू जेल जाए।

      • agar sabhi sochte samajhte aur desh ki chinta karte to desh ka yah haal nahi hota. jangalraj to hai par asli jangalraj ke bhi kuchh niyam hote hai. jagrook longon ki desh ko bahut jaroorat hai.

      • पर सच ये भी है की यह देश, देश भक्तो का नही होता.. नेताजी भुला दिए जाते है, जयप्रकाश लोहिया जैसे लोग भरमा दिए जाते है.. प्राणों की आहूत देने वाले वीरो से ज्यादा तो देश में क्रिकेटर, एक्टर सम्मान पाते है।

        माते, हाल में कहीं पढ़ा था की भारत में परमाणु तकनीक पे काम करने वाले 4-5 वैज्ञानिको की रहस्मयी तरीके से मौत हुयी थी पर खबर तो व्यापम का चलता है ताकि सरकार बने, बिगड़े और लूट का अवसर मिले..
        भारत एक अपरिपक्व राष्ट्र है और यहां के तथाकथित बुद्धिजीवी चायनीज आइटम पे अपना नाम लिख के बेचने वाले… देश ने एक नेता चुन दिया, अब सब वही करे.. हम न झाड़ू उठाएंगे न कुछ सहेंगे..हमे आरक्षण दो, नौकरी दो ये दो वो दो..बस हम आपको वोट देंगे..ये है अधिकांश लोगों की सोंच….. हम सब स्वार्थी है..

        मैं ज्यादा रियेक्ट कर रहा हूँ, पर बोलने दो न आज…

      • Log apne apne chhote chhote swarthon ke liye desh ki bhalai ke bade swarth ki bali hamesha se dete aaye hai. Man dukhi ho to bhadas to niklegi. Nikalane do aaj.

      • निकाल दिया सब भरास… आपको दीवाली की अग्रिम शुभकामना.. लक्ष्मी माता आपको सुख शांति वैभव प्रदान करे

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