बिहार चुनाव में चारामेल

बिहार को जो पहचान बुद्ध, महावीर, चाणक्य, आर्यभटट, मौर्य, अशोक, शेरशाह, राजेन्द्र प्रसाद, दिनकर, जयप्रकाश न दिला पाये वह पहचान हमारे लालटेन मार्का लालू जी ने दिलवाया, इनके और इनकी पांचवी पास बीबी के 15 साल के राज में बिहार ने इतनी तरक्की की की सारे बिहारियों के रोजगार का प्रबन्ध बिहार में ही हो गया… 90 से 2005 तक में तो बिहार के अंदर रोजगार के इतने अवसर पैदा हुए की हर हुनरमन्द बिना किसी ख़ास लागत के अपना उद्योग स्थापित कर सकता था, अब उद्योग कई थे पर अपहरण में नवयुवक दूरदृष्टी कुशल युवकों का विशेस ध्यान था.
बिहार पुरुष लालू जी के राज में किसान इतने कर्मठ और जुझारू हुए की रणवीर सेना जैसी देशभक्त सेना वो भी खुद के पैसो से बना ली, नक्सली तब एक दम शांति प्रिय हो गए, गरीबों के यहां इतने धन हुए की हमने विश्व बैंक को भी उधार दिया, उस दौर में जो भी बिहारी बिहार से बाहर रहे उनसे पूछिये उनकी कितनी इज्जत होती थी बाहर में और वो कितने फक्र से अपनी पहचान बताते थे..
खैर 15 साल के इस बेहद सफल साशन के बाद भाजपा और जदयू साथ में चुनाव लड़ी और लालू जी को धोखे से हरा दिया गया, उस महान आदमी पर चारा चोरी का लांछन लगा, कोर्ट पे टिपण्णी नहीं पर ये भाजपा, जो फासिस्ट है की साजिश थी और आज लालू को ईमानदार और साफ़ चरित्र होने का प्रमाण पत्र युग के सर्वश्रेष्ठ ईमानदार केजरीबवाल द्वारा जारी किया चूका है इसलिए अब लालू जैसे महान व्यक्ति पर कोई टिका टिपण्णी की गुंजाईश नहीं।
चलिए बात करते है लालू के बिछड़े मित्र विकास पुरुष श्री नितीश की जो थोड़े भटक गए थे, साम्प्रदायिक जुमलेबाज भाजपा के समर्थन से दो चुनाव जीत मुख्यमन्त्री बने पर मोदी जैसे फासिस्ट के प्रधानमन्त्री बनते ही उन्होंने मुख्यमन्त्री की कुर्सी तोड़ी और मांझी को पदासीन किया और फिर लालू जी के सुझाव से बिहार में विकास की बहाली के लिए मांझी को गद्दी से कान पकड़ उठा खुद बैठे.. नितीश जो कभी बहक गए थे और भाजपा के साथ बिहारीयोन को बहका लालू जैसे महान नेता के खिलाफ बोलते थे वो आज सब समझ गए है और कॉंग्रेस्स और लालूजी की मदद से बिहार में पुनः विकास और बिहारियों की खोयी पहचान वापस दिलाने के लिए प्रयासरत है इसलिए मित्रों जुमलेबाज भाजपा के बात में न फंसे, नितीश जी आज प्रायश्चित करना चाहते है, कांग्रेस के पप्पू और आपके अपने महानतम नेता श्री लालू को न केवल वोट दे बल्कि साबित करे की बिहार क्या चीज है, हम अव्वल है और केरल सबसे पीछे, धन्यवाद लालूजी, धन्यवाद राबड़ी जी और हाँ नितीश अगली बार भाजपा के इर्द गिर्द भी फटके तो फोड़ दूंगा…
जय चारा,
जय जातिवाद,
जय बिहार

-सन्नी

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7 thoughts on “बिहार चुनाव में चारामेल

  1. बहुत सही लिखा है सन्नी जी..
    जब तक बिहार के लोग नहीं चाहेंगे तब तक बिहार का विकाश संभव नहीं है..
    लोगो को तय करना है की उनको क्या चाहिए … विकास या चारा चोर

    • भैय्या हम बिहारियों को इतनी समझ होती तो हम लालू क्यों चुनते,,, खैर भगवान भला करे और हम सब को निति और नियति दे ताकि बिहार भी इस देश की प्रगति में और बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें।

  2. बहुत अच्छा, बड़े हल्के और व्यंग पूर्ण भाषा में आपने बहुत महत्वपूर्ण बात लिखी हैं. बधाई.

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