ऐसे उदाहरण हम प्रस्तुत करें

Sunny-Kumar (20)तुम भोग विलासिता के पश्चिम हो,
हम योग द्वीप के पूरब है,
तुम रोजा, चाँद के दीवाने हो,
हम सूरज को पूजने वाले है।

तुम्हे इस मिटटी में दफन है होना,
हम अग्नि में जल जाने है,
है पन्थ अलग, हर चाह अलग,
दोनों का विस्तार अलग।

तुम हो एकलौते अल्लाह के उपासक,
हम हर तत्व पूजने वाले है,
सो तुम देते हो संज्ञा काफ़िर की,
हम भी अब म्लेच्छ कहने से नहीं कतराते है।

है जान फूंका दोनों के अंदर,
और रक्त का रंग भी एक सा है,
दोनों को है दो दो नयन,
पर सब समान देखना भूल जाते है…

तुम खुद को अरबी से जोड़ते,
और मैं गर्वी हिंदुस्तानी हूँ,
तुम क़ुरआन को लानेवाले,
मैं गीता का शाक्षी हूँ।

तुम को यकीन अरबी मुहम्मद पे,
मैं सेवक सनातनी राम का हूँ,
तुमको मिला अमन का सन्देश,
और मुझे न्याय, धर्म की रक्षा का,
है सन्देशो में समानता फिर,
क्यों हम और तूम अब उलझे है?

अमन फैलाओ अहिंसा से तुम,
न काफ़िर कह कर रक्तपात करो,
मैं ईद मिलूं गले लग तुमसे,
तुम इदि में वन्देगान् करो।

है दोनों हम हिन्द धरा पर,
की इसका मिलके जयघोष करें।
दुनिया समझे मजहब के मतलब,
ऐसे उदाहरण हम प्रस्तुत करें।

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3 thoughts on “ऐसे उदाहरण हम प्रस्तुत करें

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  1. Bahut sundar…….waise
    ham kisi se nafrat nahi karte,
    Ye hamaara dharm sikhaataa hai,
    Insaan kyaa jaanwaron se bhi,
    Hame prem karna sikhata hai,
    Kudrat ke sabhi santaan hain jahaanwaale,
    Koyee dharm hi nahin jo katl karna sikhaata hai.
    Aur jo dharm katl sikhaataa hai wo dharm hi nahin.
    Phir bibaad kaisa…..?dishi kaun….?

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