हिंदुस्तान के आदर्श

अयोध्या में प्रभु श्री राम एक महाप्रतापी राजा हुए जिन्होंने अपने जीवन शैली से कर्तव्यों के प्रति निष्ठां, प्रेम, त्याग, मूल्य मर्यादा और साहस सिखाई। हम हिन्दू है हमारे लिए वो ईश्वर के अवतार थे। आप अगर हिन्दू है तो प्रभु के जीवन से बहुत कुछ सीख सकते है, अगर हिन्दू नहीं है फिर भी आप एक महाप्रतापी राजा के जीवन से बहुत कुछ सीख सकते है। श्रीराम महाप्रतापी साहसी और वीर होते हुए भी दमन से दूर प्रेम को पोषित करते रहे। वैसे ही श्री कृष्ण थे जिन्होंने कर्म को निस्वार्थ करना सीखाया, बुद्ध और महावीर ने ध्यान और शांति सीखाई तो नानक ने असमानता को दूर किया। इस भूमि ने जिनको भी आदर्श स्थापित बनाया उनमे किसी ने भी डर को प्रोत्साहित नही किया, सब ने मूल्यों और आदर्शों को ही समझाया, प्रकृति से प्रेम और पूजा सीखाया।
आज कुछ लोग इस मिटटी के होकर अरब में पैदा हुए मुहम्मद का यकीन करते है, और अरबी जीवनशैली अपनाना चाहते, कुछ यीशु भक्त जेरूसलम के आदर्श हिंदुस्तान में स्थापित करना चाहते। मेरा कोई विरोध नही है पर मैं बस ये कहना चाहता हूँ की अरब और जेरूसलम की मिटटी, भाषा, और वातावरण अलग थे तभी वहां के आदर्श जो बने उनकी प्रवृत्ति भी अलग। अरब में जहां रेत ज्यादा थी और लोगों में हिंसक प्रवृति थी तो वहीं जेरूसलम भी अत्याचार का शिकार था, यीशु ने खुद की बलिदानी देकर लोगों को दर्द सहना सीखाया तो मुहम्मद ने लोगो के जीने के तौर तरीको के लिए क़ुरान का प्रचार किया, अरब जहाँ के लोग आज भी स्त्री के लिए विकृत मानसिकता रखते है वहां बुरका की जबरदस्ती समझी गयी, नर्क का आग और स्वर्ग में हूरो का लालच भी इसी क्रम में रहा होगा, पर मेरा विरोध अल्लाह से कभी नही रहा न हो सकता है क्योंकि मैं भाषा के अंतर को समझता हूँ और वो मेरे ईश्वर को अल्लाह कहते है, मेरे ईश्वर ने मुझे भारत भूमि में पैदा किया जिस भूमि में एक से बढ़ कर एक प्रतापी राजा, त्यागी ब्राह्मण और नए पन्थ देने वाले नए नए आदर्श हुये। मुझे ईश्वर के काम पर यकीन हैं, जिसने अरब, जेरुसलन और भारत को उसके प्रकृति के अनुरूप आदर्श दिए और जीवन को समझाया। आज श्रीराम, बुद्ध, महावीर, नानक के आदर्शों को अगर यहां के मुहम्मद समर्थक नहीं समझ रहे तो ये उनकी अजीब जीद है क्योंकि इस मिट्टी में पैदा हुआ हर वीर चाहे वो जिस युग में रहा हो ने दमन नही सीखाया, उसने बेहतर जीवन और मूल्यों को ही समझाया, भोग के ऊपर त्याग को वरीयता देने वाले इस भूमि के लोग आज अगर किसी अरबी भोगी को अपना आदर्श मानते है तो वो चिंतन करें और अपने जड़ को पहचाने,घर वापसी के लिए हम न तो पैसे दे सकते न हमें 72 हूर मिलने है पर एक कोशिश है की इस मिटटी के मूल्य, यहां की संस्कृति सभ्यता के प्रति हम सब जवाबदेह रहे। त्याग, तपस्या, और धार्मिक सद्भाव की यह भूमि जग में हमेशा विशेष रहे।

-सन्नी कुमार

Advertisements

2 thoughts on “हिंदुस्तान के आदर्श

  1. This line is perfect – “श्रीराम महाप्रतापी साहसी और वीर होते हुए भी दमन से दूर प्रेम को पोषित करते रहे।”

Feedback Please :)

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s