गौहत्या एक गुनाह

भारत भूमि इस विश्व के नक्शे में सबसे महान है जहां की संस्कृति में मिटटी, जल, पेड़, सबका सम्मान है सबके प्रति मनुष्य मन में ऋणी होने का बोध है, भारत हिंदुओं का देश रहा है और आज भी यहां के लोग चाहे जिस धर्म को मानते हो वो हिंदुत्व से प्रभावित है और यही कारन है की इस देश ने हर धर्म को फलने का अवसर दिया है किन्तु क्या आज इस देश में रहने वाले लोग यहां की संस्कृति के प्रति जवाबदेह नही है? हमारी संस्कृति में गाय को माँ का स्वरूप् माना गया है, कारण भावनात्मक और तार्किक दोनों है, आज अगर कोई आपको उस संस्कृति, उस पालनहारी गौ की हत्या से रोक रहा है तो आप क्या आज कुछ और नहीं खा सकते? पता नहीं आपकी भूख कितनी बड़ी होगी पर यहां मैं एक कोशिश करता हूँ की समझा सकु हिंदुस्तान में गौहत्या क्यों गुनाह है और इस रोकने का प्रयास क्यों पुरे देश में अविलम्ब होना चाहिए।
हिन्दू मानुष जो प्रकृति के हर रूप से प्रेम करता है, गाय को अपनी माँ के रूप में देखता है और उसके प्रति सम्मान औरे ऋणी होने का भावना रखता है। गाय एक बहुत शांत जीव है जिससे मनुष्य को कोई खतरा नही, प्रकृति ने हर फसल में गोवंश के लिए अपना हिस्सा भी दिया है जो गौवंश के न होने पर बर्बाद होता है, फिर भी गौमांस की भूख हमें उन दिनों में धकेलने का प्रयास करती है जब मनुष्य अपने जीवन को बचाने के लिए कुछ भी खा के नंगा पंगा रहता था, पर आज हम शभ्य समाज में है, बेहतर जीवन के लिए धर्म है, आदर्श है और हम ईश्वर तक पहुँचने की कोशिश का दम्भ भी भर रहे है फिर भी उस जीव की हत्या को जायज बता रहे जो उम्र भर अपने बचरे का दूध आपको आपके बच्चे को पिलाती है, उसके दूध से आप न जाने कितने मिठाई, दूध मक्खन पनीर बनाते है और उसके बाद भी उस निसहाय जीव के प्रति ऐसा रवैया?? शर्म आती है मुझे जब ऋषि कपूर, अंशुमान, फरहान को सुनता हु की किस बेबाकी से वो अपनी जाहिलियत दरशा देते है पर अगर आप हिन्दू है तो उस जीव की रक्षा का निर्देश आपके धार्मिक किताबों में है, अगर आप ईसाई है तो प्रेम का परिचय दे, अगर आप मुहम्मद के चाहने वाले है कुरान वाले तो वहां भी उल्लेख है की जिस  मिटटी में रहो उसकी संस्कृति से प्यार करो, अगर आप धार्मिक है तो धर्म यही कहता है की जिसने आप पर उपकार किया हो, आपको पलने में मदद किया हो उसको न मारे। और गाय किसी के लिये खतरा नही जैसा की पहले भी लिख चूका हूँ की प्रकृति ने उसके भोजन के लिए ही हर फसल में उसका हिस्सा छोड़ा है। अब चुकी आप हिन्दू मन है या नही पर अगर आप मनुष्य है तो आपको समझने के लिए काफी है की आप गाय न मारेंगे तब भी आप की भूख मर जायेगी पर आप गाय मारते ही एक भेड़िया हो जायेंगे जिसकी भूख किसी के जान से शांत होगी। मैं कसाई का विरोध उतना नही करता क्योंकि हो सकता है उस जाहिल को कुछ और न मिला हो करने को पर आप?
कुछ मित्रों का यह भी कहना है की उनके धार्मिक किताब में गौहत्या में बुराई नही लिखा गया, आज उनलोगों को कहना चाहता हूँ की अरब की तुलना हिंदुस्तान से नही की जा सकती, दोनों जगह के भाषा लोग प्रकृति में परिवर्तन है, हमारी प्रवृति अलग है, अगर सब एक होता तो दो अलग धर्म न होते। उनके यहां की मिटटी हिंदुस्तान की तरह नही जहाँ हर फल उग सके, मांस उनकी मजबूरी रही होगी ऐसा इस मन को लगता है। रेत पे जीने वाले अगर आप भी हो और वहां कुछ और न हो तो अपने जीवन को बचाने के लिए आप कुछ भी करो इसको जायज माना जा सकता है पर हिंदुस्तान, ईश्वर की कृपा से इतना सम्पन्न है की तुम एक हत्या किये बिना भी अपनी भूख शांत कर सकते हो।
वह धर्म नहीं अधर्म होगा जिसमे उपकार का ऋण ऐसे चुकाया जाता होगा, वह धर्म नही अधर्म होगा जिसमे अपनी लालसा की पूर्ति के लिए किसी को मारा जाता होगा।
निवेदन- गौहत्या से बचे इंसान बने।
-सन्नी कुमार
#BanBeef

(I oppose innocense slaughtering, I support Ban Beef and heartily thankful to Haryana and Maharashtra People for making it possible and saving our rich culture. Share if you care.)

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6 thoughts on “गौहत्या एक गुनाह

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  1. काफी अच्छा व प्रशंसनीय लेख। दरअसल भारत को ऐसी सोच और एक मुहिम की जरूरत है ताकि गौहत्या प्रतिबंध पूरे देश मे लग सके। आपकी अंतिम पंक्तियों के विचार स्वामी विवेकानंद जी से मिलते हैं। उन्होंने ने भी धर्म के बीच का अंतर दो देशों की जलवायु व भूमि के आधार पर समझाया था।

    1. आभार, उम्मीद है हमारे जैसे सोच वाले लोगों की संख्या बढे और धार्मिक उन्माद का दौर ख़त्म हो..

  2. तुलसी पेड़ न जानिए,
    गाय न जानिए ढोर,
    गुरु मनुज न जानिए,
    ये तीनों नंदकिशोर।

    आज यूपी में अवैध कत्लखानों के बन्द होने से कुछ लोगों में ऐसी बेचैनी है मानो उनसे समस्त भोजन छीन लिया गया हो, वैसे कत्लखाने अब भी खुले है और किसी की हत्या कर भूख मिटाने का चलन जारी है और रहेगा जिसके कारणों पे अभी नहीं जाउंगा, पर अपने उन पढ़े-लिखे, विचारवान, आजादी के पक्षधर(जिसमें नंगई और बेहूदगी ज्यादा हो) मित्रों से पूछना चाहूंगा कि हमें अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने की प्रेरणा देनेवाले वीर मंगल पांडे क्यों लडे थे?

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