Avichal : अविचल

अविचल

Bhav-Abhivykti

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है जग वालों का काम यही, वो उर में संशय भर देंगे |

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित कर देंगे ||

तम घोर निशा के नैराश्य में, पथ ना दिखाई देगा फ़िर,

स्वरों के प्रचण्ड प्रभंजन में, कुछ ना सुनाई देगा फ़िर |

विपदा तडित और गर्जन भी, पल-पल तुझको डर देंगे |

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित कर देंगे ||

संशय, दुविधा के सागर में, डगमग निर्णय नैया डोलेगी,

घोर असमंजश की उठ उठ लहरें, तेरे साहस को तौलेगी |

संकट के चक्रावातों को बस, तेरे धैर्य, शौर्य ही उत्तर देंगे,

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित कर देंगे ||

अड़चन गिरी सी आकर सन्मुख, पथ तेरा अवरुद्ध करेगी,

अथाह गर्त की गहराई सी, नाकामी अतिशय क्षुब्ध करेगी |

अवसरवादी प्रतिकूल तेरे हो, अपने और मुखुर स्वर देंगे |

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित…

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