फेंकू तो बस झूठा था

I congratulate Arvind Kejriwal and his intellectual team which has not just promised something nearer to impossible but also get succeed to capitalise vote on their 70 points agenda. Delhites, and other parties like CPI, TMC, JDU, RJD and may be congress have supported them, and it was something more than they expected. To AAAtards, You people are created history once again and I pray this time you won’t run away. Here is my observation on Delhi Election on base of talk with my friends, hope you get things in right way.

जब गया पूछने लोगों से,
क्यों बेदी को हरवाया है?
लगने कहे सब घेर के यार,
बेदी कहां, मोदी को हमने हराया है,
15 लाख नही है आये,
सो हमने यह जनादेश सुनाया है।

फिर कहने लगे,
फेंकू बस झूठी बातें करता है,
बस बाँटने की नियत रखता है,
काशी में करता वो गंगा आरती,
और नवराते में मेक इन इंडिया की शुरुआत,
आप कहो जी क्या नही यह सांप्रदायिक बात?

टीका वो खूब लगाता है,
पर टोपी से घबराता है,
फिर क्यों उम्मीद उसको हमसे,
की वो तो चादर भी नही चढ़ाता है?

छोडो जी ये सब है फसाद की बातें,
हम है एक अमन पसंद कौम,
अरविन्द हमारा, हम सा है,
सो हमको अब झाड़ू पसंद,
बेदीजी, भी ठीक ही थी,
पर ठहरे जी हम दिन(धर्म) के लोग,
इमाम की बातें मानी हमने,
सो बटन दबाया झाड़ू को।

स्वराज से हमको क्या मतलब जी,
बस हमको बटला का इन्साफ मिलें,
अरविन्द को टोपी पहनाया हैं,
बस अब उसको ईमान मिले।

हम गए जो समझाने मोदी प्रयास,
उनको कुछ भी समझ न आया,
कहने लगे मुस्लिम निर्दोष,
उनको अब केजरी से उम्मीद,
बटला की जाँच करायेगा,
वो सच्चा बेटा हिन्द का,
सबतक न्याय पहुंचाएगा।

समझ गए ताऊ को हम,
और अरविन्द से इनकी उम्मीदों को,
पर ये इनकी थी अभी आगे चलतेे है,
क्यूँ हारी बेदी औरों से भी जानतेे है।

अब मिले जिनसे वो मुलाजिम सरकारी,
पूछते ही टूट परे हम पर,
कहने लगे फेंकू है झुठा,
बस काम काम ही करता है,
भत्ता कुछ है बढ़ाया नही,
और समय से आने की नसीहत देता है,
जी वो ठहरा अम्बानी का मित्र,
पर हमें सब दफ्तर से ही मिलना है,
रोके रखा है तनख्वाहों की वृद्धि,
मर रहे है हम उसको नही जी एहसास है।

इनकी पीड़ा समझी हमने,
समझेंगे अब मोदी भी,
राष्ट्रहित की बात नहीं जी,
जरुरी है मक्कारी भी।

शाम को जब जी पार्क गया,
मिल गए कुछ क्रन्तिकारी युवा,
चुनाव का ही था जी बहस छिड़ा,
समझा रहे थे क्यों जीती आप।
गिनवा रहे थे केजरी की डिग्री,
और उनकी उपलब्धि तमाम,
कोई बोल रहा था भगोड़ा उसको,
सब समझाने लगे वो गलती थी,
फिर हमने उनकी उम्मीदों को,
कहे की अब 20 कॉलेज, 500 स्कूल,
और फ्री में wifi आएगा,
जी फेंकू तो बस झूठा था,
अरविन्द स्वराज को लाएगा।

समझ गए युवाओं की शक्ति,
इनको केजरी ने खूब संभाला था,
देश से बड़ा आपियों का बजट,
और इसमें सबको भरमाया था,

अभी पार्क से निकलने को थे,
भुजा वाले से भी थोड़ी गपशप हुयी,
भुजा उनका जी रोज सा था,
पर जी व्यवहार थोडा बदला था,
अरविन्द के जीत की ख़ुशी,
उनके ललाट पर छाया था।
पूछे भैया वोट दिया था,
तपाक बोले “जी झाड़ू को”
पूछे क्यों नही वोट बेदी को,
बेदी क्या देती जी आप कहो,
अरविन्द सस्ता भोजन पानी देगा,
गरीबों का है हमदर्द वो,
दिल्ली में स्वराज ला देगा।

समझ लिए इनकी भी हसरत,
केजरी ने इनको भी खूब लुभाया था,
मुफ़्त पानी की प्रीत में,
उसने दिल्ली को बहाया था।

लौट रहे थे घर को जब,
बस में कुछ लोग मिलें,
नियोजन से पक्की नौकरी का,
इनको भी है विस्वास मिला,
आप के मफलर मैन को,
सबसे है सम्मान मिला?

घर जब पहुंचे,
बहुत विचारा,
क्यों बेदी दिल्ली हारी है,
क्यों भगोड़ा केजरी जीता है,
क्या वाक़ई स्वराज आ जायेगी,
या फिर चापलूसों की सरकार बनेगी,
ख़त्म हो रहा कांग्रेस अब जब,
क्या आप उनका जनाधार संभालेगी?
समझ नही आता अब राजनीती,
न मुफ्तखोरी से राष्ट्रनीति,
कहीं जूसर, लैपटॉप बटता है,
दिल्ली ठहरी बड़ी विशेस,
यहाँ अलग अलग पॅकेज मिलता है।

खबरें बस केजरी के जीत की,
पर बेदी भी तो हारी थी,
सुना। उनसे अपनों को ही गुरेज़,
पर दिल्ली स्वक्ष छवि जी चाहती थी,
कल तक बेदी सी सबको बेटी थी चाहिए,
पर आज उसी को हराया था,
35 वर्षो के अनुभव को,
पानी के प्रीत में बहाया था?
-सन्नी कुमार

Neither AAP manifesto nor Delhites were caring for Lokpal this time, People just want peace, relaxed life and yes cheaper products, electricity, water n Wi-Fi for free.

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8 thoughts on “फेंकू तो बस झूठा था

    • आपका धन्यवाद इंदिरा जी, आप न केवल पढ़ती है बल्कि मेरा उत्साह भी बढाती आप, खूब खूब आभार।
      वैसे केजरीवाल के वायदें भी चुनावी जुमले ही रह जायेंगे बस देखना ये है की किस खूबसूरती के साथ वो दोष केंद्र पर मढ़ते है।

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