अभिव्यक्ति का अधिकार

अभिव्यक्ति का अधिकार को अगर जल्द ही सीमित और परिभाषित नही किया गया तो हिंदुस्तान भी फ्रांस की तरह सेकुलर होने का फल भुगत सकता है, क्युकी कल PK पर हम खुश तो थे पर अगर जवाब में किसी ने शैतान को पत्थर मारने वाली प्रथा को रौंग नंबर कह दिया तो तस्वीरें बदल सकती है. ज़रा सोचिये, हजारों किमी दूर इराक के ISIS के लिए अगर भर्ती बैंगलोर से हो जाती है तो आप समझ सकते है की लोग यहाँ भी घात को तैयार बैठे होंगे, अतः इससे पहले की देरी हो हमें कानून बनाकर शांति की पहल कर देनी चाहिए. मै तो कहूँगा की अगर देश एक है तो एक ही न्याय प्रणाली हो, ये निजी बोर्ड, निजी कानून का चलन भी ख़तम हो, ये गैर जरुरी है और असमानता फैलाती है.. सहमत हो तो शेयर करें.

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3 thoughts on “अभिव्यक्ति का अधिकार

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