बड़े बाबू की तकलीफ

Clean India
बड़ाबाबू आज अखबार देख कर पूरी तरह खींझ गये. दरअसल जबसे(२ अक्टूबर)   स्वक्षता मिशन शुरू हुआ है तब से हर रोज अखबार के पन्ने इस मिशन से जुडी खबरें छाप रही है, प्रधानमन्त्री, राजनेताओ, प्रमुख कलाकारों, अधिकारीयों की खबरें तो पहले सप्ताह मेँ ही छप चुकी थी, अब तो छुटभैय्ये नेताओं, और स्वघोषित समाजस्वकों के इस मिशन से जुड़ने की खबरें आ रही है और ऐसे माहौल में बड़ाबाबू जो खुद को ईमानदार और तत्कालीन सरकार समर्थक कहते है, का इस मिशन में लोगों की नजरों में ना आने का मलाल उनको चिंतित कर रहा था.
बड़ाबाबू ने अब और विलम्ब करना उचित ना समझा, सो प्रेस में खबर भिजवा दी की कल उनके यहाँ स्वक्षता अभियान चलाया जायेगा, समय तय हुआ, बड़ाबाबू ने तैयारिओं के लिए अपने सभी सहकर्मियों को जानकारी दे दी। इस खबर से सहकर्मी भी खुश हुए की इसी बहाने थोड़ी मस्ती हो जाएगी और लोकप्रियता हाथ लगेगी सो अलग. पर लोगों ने बड़े बाबू की इस पहल पर उनसे पूछा की दफ्तर तो पहले से ही साफ़ है, हर रोज नियमित सफाई हो जाती है और आसपास की सड़कें भी V.I.P. है, फिर सफाई कहाँ करेंगे? बड़ाबाबू बोले की यह तो मेरे भी दिमाग में था और ये भी एक वजह है की हम इस मिशन में देर से शामिल हो रहे है पर अब प्रश्नों में नही उलझना है, कल सफाई, सफाई-कर्मचारी नही करेगा, हमलोग स्वयं करेंगे और आप सब आज कोशिश करें की आज का कचरा परिसर में ही छोड़ कर जाए. बड़ाबाबू से सब सहमत हुए और कल की तैयारियां होने लगी.
अगली सुबह सब समय से पहले थे, बड़ाबाबू के मन की प्रसन्नता चेहरे पर स्पष्ट नजर आ रही थी, वे दफ्तर पहुँचते ही सफाई-कर्मचारी से मिले और व्यवस्था को समझा| कुछ स्नैक्स के रैपर, कागज़ और फूल पत्ते सफाई-कर्मचारी ने पहले से एकत्र कर रखा था किन्तु कचरे की मात्रा से बाबूजी संतुष्ट नही थे पर खैर अभियान से जुड़ने की ख़ुशी थी,और उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया फिर उन्होंने झाड़ूओं का निरीक्षण कीया और फिर एक बड़ी लाठी वाले झाड़ू को थाम लिया। तब तक अतिथि और प्रेस वाले भी आ गए थे. दफ्तर के सभी लोग बैनर, झाड़ू लेकर, अभियान की शुरुआत को उत्सुक थे तभी कैमरामैन ने कहा की ये थोड़ा सा कचरा है ठीक से वीडियो ना बन पाएगी. उसकी बात से बड़े बाबू सहमत थे और फिर छोटेबाबू ने तुरंत पास के अस्पताल से कुछ कचरा मंगवा लिया। बड़े बाबू अपने सहकर्मियों के समर्थन और उनके उत्साह से प्रभावित हुए और फिर प्रेससकर्मियों ने देरी हो रही बोलकर, सबको बैनर झाड़ू ले खड़े हो जाने को कहा, प्रेससकर्मियों की इस सुचना के बाद तो झाड़ू पकड़ने और अगली पंक्ति में खड़े होने की अघोषित प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी, बड़े बाबूजो अगली पंक्ति में खरे थे धक्का खाकर पिछली पंक्ति में पहुँच गए थे, फिर उनके आदेश के साथ ये स्पर्धा खत्म हुयी और वो एक बार फिर से अगली पंक्ति में पहुँच चुके थे. आज नियमित सफाई करने वाला व्यक्ति कहीं भीड़ में था और अगली पंक्ति में झाड़ू पकडे शहर के कुछ प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीयनेता और बड़ाबाबू स्वक्षता के महत्व के लिए बनावटी गंभीर मुद्रा में झाड़ू संग गन्दगी के विरुद्ध जंग छेड़ रहे थे. इस कार्यक्रम को होते होते दोपहर हो गया फिर बाहरी लोग चाय नाश्ता करके वापिस चले गए| आज कार्यालय का कार्य चर्चाओं के साथ चला. खैर कुल मिलाकर बड़े बाबू अभियान से जुड़ने काफी खुश थे.
अगली सुबह बड़ेबाबू अखबार का बड़े बेसब्री से इन्तेजार कर रहे थे और जब खबर पढ़ी तो उनके पसीने आ गए क्यूंकि अखबार ने उनके कचरा मैनेजमेंट को प्रमुखता से छाप दिया था. अब बड़े बाबू को आभास हो गया था की लोकप्रियता की जरुरत लोगों को ही नहीं अखबारों(मीडिया) को भी हो गयी है.

सन्नी कुमार

[एक निवेदन- आपको यह पोस्ट रचना कैसी लगी, कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

[Picture is for representation only and and taken from google. I support our Honorable PM for all his Initiative and encourage all बड़ाबाबू kind poeple  to take this mission serious. Thank you.]

Advertisements

7 thoughts on “बड़े बाबू की तकलीफ

Add yours

  1. Bahut sahi baat ‘ लोकप्रियता की जरुरत लोगों को ही नहीं अखबारों(मीडिया) को भी हो गयी है.’ aur hamesha se hi hai. Bahut achchha likha hai.

Feedback Please :)

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: