A request to my Muslim brothers- Sunny Kumar

प्यारे मुस्लिम भाइयों,
आप सब से एक आग्रह है, निवेदन है और यही आपको सलाह भी की अब और इस्लाम के नाम पर खून मत बहाइये, हाँ मुझे मालुम है कि  आप सब एक जैसे नहीं है और जो सच्चे मुस्लमान है वो अब भी अमनपसनद है और उनके जिहाद की परिभाषा भी अलग है, पर क्या मैं पूछ सकता हूँ अपने उन्हीं सच्चे धर्मिक, शांतिप्रिय भाइयों से की आज आप इतने बेबस क्यों है? आज आप उन मुसलमानो के खिलाफ क्यों नहीं आवाज़  उठा रहे जो सच्चे इस्लाम और उसके नेक मंसूबों को बदनाम कर रहे? क्यों आप इन स्वघोषित धर्म के प्रचार-प्रसारक को नहीं रोक रहे जो आपके अपनों को नेकी से दूर ले जा रहे और जिहाद के नाम पर अपने साथ औरों की भी जिंदगी को जहन्नुम बना रहे?

आप सब कहते है और मैं अब भी यक़ीन करता हूँ की इस्लाम अमन सिखाता है पर फिर यही मन पूछता है की गैर मुस्लिमों को, अपने ही सुन्नी भाइयों को क्यों मारा काटा जा रहा?  फिर क्यों तलवार यज़ीदियों को काटा जा रहा, क्यूं उनके बीवी बच्चे इज्जत से नही जी सकते? किस तरह का खौफ पैदा करना चाहते है ये जाहिल लोग और क्या ऐसे बढ़ाएंगे अमन को? इस्लाम को??

आप बस इतना कह कर कि “इस्लाम सच्चा है पर सारे मुस्लमान नही”, अपनी जिम्मेदारी से नहीं हट सकते. अगर आप इनका समर्थन करते है तो कीजिये ये आपका अपना मत है और अगर विरोध करते तो इनके खिलाफ जिहाद करिये वरना इन लोगों के हरकतों को, इनकी मंसूबों को अगर पंख मिलेगी और अगर ये कामयाब रहे तो मुस्लमान तो बहुत होंगे वहां पर इस्लाम नहीं होगा, अमन नहीं होगा और फिर एक बार जो तलवारों को खून की आदत लग जायेगी तब वो आपस में लड़ेंगे या पडोसी मुल्कों से.
अगर आप इतना कुछ होने के बाद भी चुप रहते है तो मैं अब और नहीं मानूंगा की आप उनसे नहीं है. नहीं, अब और चुप मत रहिये, इतिहास में कहाँ क्या हुआ उसपर हम कभी और चलेंगे पर अभी वाक़ई इस्लाम खतरे में है, उसका सन्देश खतरे में है और ये किसी और पंथ के लोगों से नहीं बल्कि खुद के बिगड़े मुसलमानों की वजह से है जो खून खराबा कर रहे.

अच्छा है की आप चिंतित है पर उनको बस इसीलिए अँधा समर्थन की वहां एक गैरमुस्लिम  मुस्लमान  को मार रहा? अरे आप युद्ध रुकवाइये, हर शिक्षित शभ्य समाज आपके लिए प्रार्थना करिये और इस बात पर अमल भी की क्यों आज जहाँ भी मुस्लिम लड़ता है वहां हर युद्ध धर्म युद्ध बना दिया जा रहा और जहाँ खुद में लड़ाई है वहां आप तमाशबीन है. आप एक ओर चिंतित है पर दूसरी ओर चुप फिर कैसा अमन चाहते है आप? संख्या बल होना जरुरी है, एक मत के लोग हो तो अच्छा लगता है पर सब एक तरह क लोग? सच यही है की सारे रंग हो तभी दुनिया खूबसूरत लगाती है. आज जब सच्चे मुसलमानो से लिख रहा हूँ तो एक उम्मीद से लिख रहा हूँ और कहना/पूछना चाहता हूँ कि जब आप लोग हर गलत व्यक्ति/संगठन/देश के खिलाफ फतवा जारी करते हो तो  फिर इन आतंकवादियों के खिलाफ क्यों नही? क्या आपको अपने ही मुस्लमान भाई का आतंकवादी कहलाना पसंद है? क्या आपको लगता है की उनका जिहाद सिर्फ बन्दूक और तलवार से ही हो सकता? ये शिया, सुन्नी, वहाबी, अहमदियां, इसाई, यहूदी इनको अल्लाह के भरोसे छोड़ दीजिये, बस आप अपनी अच्छाइयों को बढाइये लोग  निश्चित मानने लगेंगे. 

बहुत कुछ कहना है पर अभी उन यज़ीदियों की सोच रहा हूँ तो अफ़सोस भी हो रहा है गुस्सा भी और हंसी भी की कैसे जाहिल है जो इस तरह से एक अमनपसंद धर्म को बदनाम कर रहे. पता नहीं कौन सी सनक सवार है, क्या ऐसे ही खुलता है जन्नत का राश्ता, यही  शिक्षा है ईमान की और क्या ऐसे ही बना था/बनेगा इस्लाम?

https://www.youtube.com/watch?v=HdIEm1s6yhY
आप से, जी आप सच्चे इस्लामिक लोगों से जो समय समय हिदायत देते, जो फतवा जारी करते है, अब आप बोलिए वरना हम आपकी चुप्पी को उनसे सहमति सम्झेंगे. आग्रह है आप इन तमाम आतंकवादी संगठनो  विरोध करें और अपने बच्चों को सही शिक्षा दे. मै प्रभावित हूँ इस्लाम के कुछ अच्छी बातों से, हिजाब से, दान देने  प्रवृति से, पांचों वक़्त के नमाजियों से, अशफ़ाक़, कलाम जैसे लोगों से,  हाँ मै प्रभावित हूँ. आज भी मुस्लिम बाकी धर्म के लोगों से ज्यादा अपने दीन के लिए वक़्त निकाल रहा. जो अच्छे बने उनका जिक्र कम है और जो बुरे है वही आज दीन के रक्षक कहला रहे, बच्चों को बंदूकें थमा कर कसाब की जिंदगी दे रहे. हे  अल्लाह को मानने वालों आपका गलत लोगों के खिलाफ चुप्पी निराश करता है सो आज आप सही मायनों में अमन का सन्देश दे, इन संगठनो का विरोध करें, यजीदी लोगों के लिए दुआ करें और मेरे उम्मीदों को पंख दे.

सन्नी कुमार

[A Request to Readers- If you are reading please share this post, you can even copy and can ask to muslim brothers what they do think, what they are going to do next? Do they support ISIS, if not then why not fatwa against ISIS which has brutally killed a man, slaughtered thousand of muslims/non muslims and forced their women for sex slave. Please share my post and let my brothers know that i expect peace from them and i can be keep silent yajeedis deserves a life.]

Advertisements

5 thoughts on “A request to my Muslim brothers- Sunny Kumar

Add yours

    1. Shukriya Subodh ji. Mujhe khushi tab hogi jab meri bat un bandhuon tak pahunche jinki haalat aaj kharaab bhi hai aur badnaam bhi.

      Aapka blog par swagat hai aur aapke naye blog se ummidein bhi. 🙂

Feedback Please :)

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: