मुझे आजाद कर दो तुम..

Suno Ab Maaf KAr DO

मुझे आजाद कर दो तुम,
मुझे अब माफ़ कर दो तुम,
मै अब भी उलझा हूँ उन्हीं लम्हों में,
जहाँ रिश्तो को  तोड़ गए थे हम.

कहो कुछ भी,
दो चाहे जो सज़ा मंजुर,
मुझे बस माफ़ कर दो तुम,
मुझे आजाद कर दो तुम.

रुलाती है तुम्हारी बातें,
समझ आती है हर उलझन,
की जब बीता है मुझपर भी,
समझ आता है  बीता कल.

सुनो अब माफ़ कर दो तुम,
मुझे आजाद कर दो तुम..

बहुत रोता हूँ, तन्हां हूँ,
तुम्हें खोने को जीता हूँ.
हूँ जिन्दा भी कहाँ अब मैँ,
की अब जो रोज मरता हूँ.

सुनो अब माफ़ कर दो तुम,
मुझे आजाद कर दो तुम..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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[mujhe aajad kar do tum, mujhe ab maaf kar do tum.. mai ab bhi atka unhi lamho mein, jahan rishte tod gaye the hum…… kaho kuchh bhi, do chaahe jo sajaa manjurr, mujhe bus maaf kar do tum, mujhe aajad kar do tum…rulaati hai tumhari baatein, samjh aati hai har uljhaan, ki jab beeta hai mujhpe bhi, samjh aaya tha kya beeta kal, suno maaf kar do ab, mujhe aajad kar do ab…bahut rota hu tanha hu, tumhare khone ko jeeta hun, mai jinda hun kahan ab mai, ki mai ab roj marta hun….]

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4 thoughts on “मुझे आजाद कर दो तुम..

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