यह खरौना गाँव हमारा..

shakti-sthal1गाँव में सबसे प्यारा-न्यारा है हमारा गाँव,
शक्तिस्थल-रामजानकी बढ़ाती जिसकी शान..
गाँव हमारा बाईस टोलों का है कहलाता ,
पर डीह-जयराम-बसंत यहाँ मुख्यतः जाना जाता…

सुबह माँ की आरती से,
जहाँ हो दिन की शुरुआत.
सालों भर जहाँ पूजा के चर्चे,
और हो मंदिर-मठ की बात,
वही खरौना गाँव हमारा हमारा,
जिसपे हम सबको नाज…

बात अगर जो सडको की हो,
या फिर शिक्षण संस्थाओ की,
खरौना प्रथम पंक्ति में खडा है,
इस लीची-प्रदेश में..

???????????????????????????????राजनीती का प्रथम अध्याय,
समाज हमारी स्वतः सिखलाती.
बूढ़े हो या फिर बच्चे,
सबकी समझ इसमें चौकाती…

चर्चे हो दबंगई के,और नाम खरौना का ना आवे?
दबंगों की दबंगई में दबता-दबाता गाँव हमारा,
पर बाकियों पे है बीस,
यह खरौना गाँव हमारा..

-सन्नी कुमार

[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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This poem is a way to show my love for my village Kharauna. You can visit Kharauna’s Website to know more about this beautiful land where i born and brought.]

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